इस कैलकुलेटर का इस्तेमाल कैसे करें
- प्रॉपर्टी की मौजूदा बाज़ार कीमत घर की वैल्यू में डालें।
- उस पर अभी जो होम लोन बाकी है, वह होम लोन बकाया में लिखें (कोई लोन नहीं तो 0)।
- बैंक प्रॉपर्टी की कितने प्रतिशत वैल्यू तक कुल लोन देता है, वह अधिकतम लोन-टू-वैल्यू (LTV) में डालें।
- लोन अगेंस्ट प्रॉपर्टी की ब्याज दर और लोन अवधि भरें, फिर आपको इतना लोन मिल सकता है और पूरी राशि पर मासिक EMI देखें।
LAP की अधिकतम राशि कैसे निकलती है
बैंक प्रॉपर्टी की पूरी कीमत पर लोन नहीं देता। वह कीमत का एक हिस्सा (LTV) तय करता है, और उसमें से प्रॉपर्टी पर पहले से चल रहा लोन घटा देता है। जो बचता है, वही नया लोन बन सकता है।
अधिकतम LAP = V × LTV − B इक्विटी = V − B- V = प्रॉपर्टी की वैल्यू (बैंक के वैल्यूएशन के अनुसार)
- LTV = बैंक की अधिकतम लोन-टू-वैल्यू सीमा, दशमलव में
- B = मौजूदा होम लोन बकाया
- EMI = सामान्य EMI फॉर्मूला, अधिकतम राशि, दर और अवधि पर
आपकी इक्विटी यानी प्रॉपर्टी में आपका असली हिस्सा = कीमत − बकाया लोन।
उदाहरण: ₹1 करोड़ का घर, ₹20 लाख लोन बाकी
आपके घर की कीमत ₹1 करोड़ है और उस पर ₹20 लाख का होम लोन बाकी है। आपकी घर में आपकी इक्विटी ₹80 लाख है और मौजूदा लोन-टू-वैल्यू (LTV) 20%।
अगर बैंक 60% LTV तक देता है, तो उस सीमा में से पुराना ₹20 लाख घटाकर आपको ₹40 लाख तक LAP मिल सकता है।
पूरे ₹40 लाख 10% पर 15 साल के लिए लें, तो EMI ₹42,984.20 होगी। 60% LTV और 10% दर यहां सिर्फ उदाहरण हैं; बैंक प्रॉपर्टी के प्रकार (रहने वाला, कमर्शियल, प्लॉट) और आपकी आय के हिसाब से अलग सीमा तय करते हैं।
नतीजे का इस्तेमाल कैसे करें
अधिकतम राशि मिलना और उसे लेना दो अलग बातें हैं। बैंक आपकी आय और मौजूदा EMI देखकर भी लोन घटा सकता है। नई EMI को अपनी आय के अनुपात में DTI कैलकुलेटर से जांचें।
उतना ही लें जितनी ज़रूरत है और इक्विटी का कुछ हिस्सा सुरक्षा के लिए रहने दें। अगर प्रॉपर्टी की कीमत गिरती है या आय रुकती है, तो गिरवी रखा घर जोखिम में आ सकता है।
अगर मक़सद महंगे कर्ज़ चुकाना है, तो पहले डेट कंसॉलिडेशन कैलकुलेटर से देखें कि लंबी अवधि में कुल ब्याज सच में घटेगा या नहीं।
सावधानियां
- LAP की अवधि लंबी होती है; छोटी ज़रूरत को 15 साल में फैलाने से कुल ब्याज बढ़ता है।
- प्रोसेसिंग फीस, वैल्यूएशन, लीगल और स्टांप/MOD खर्च पूछें और KFS में APR देखें।
- व्यवसाय के लिए लिए गए लोन पर फोरक्लोज़र चार्ज के नियम अलग हो सकते हैं — शर्तें पढ़ें।
- होम लोन टॉप-अप भी एक विकल्प है; दोनों की दर और फीस मिलाएं।
- समय से पहले चुकाने का असर लोन प्रीपेमेंट कैलकुलेटर से देखें।
मान्यताएं और सीमाएं
कैलकुलेटर आपकी डाली गई कीमत को ही वैल्यू मानता है; बैंक का वैल्यूएशन कम हो सकता है। LTV, दर और अवधि आप डालते हैं — यह किसी बैंक का ऑफर नहीं है।
EMI स्थिर दर पर निकली है, जबकि ज़्यादातर LAP फ्लोटिंग दर पर होते हैं। आय के आधार पर पात्रता, फीस, बीमा और टैक्स असर इसमें शामिल नहीं हैं। अंतिम राशि और शर्तें बैंक के सैंक्शन लेटर और KFS से तय होंगी।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रॉपर्टी पर कितना लोन मिल सकता है?
प्रॉपर्टी की वैल्यू का वह हिस्सा जो बैंक की LTV सीमा में आता है, उसमें से मौजूदा लोन घटाकर। सीमा बैंक, प्रॉपर्टी के प्रकार और आपकी आय पर निर्भर है।
LAP और होम लोन टॉप-अप में क्या फर्क है?
टॉप-अप आपके मौजूदा होम लोन बैंक से उसी प्रॉपर्टी पर अतिरिक्त लोन है। LAP किसी भी प्रॉपर्टी पर, किसी भी बैंक से अलग लोन हो सकता है। दोनों में प्रॉपर्टी गिरवी रहती है।
क्या LAP पर्सनल लोन से सस्ता है?
गिरवी होने की वजह से LAP की दर अक्सर पर्सनल लोन से कम होती है, लेकिन फीस ज़्यादा और प्रक्रिया लंबी होती है। तुलना APR पर करें।
किराए वाली या कमर्शियल प्रॉपर्टी पर भी LAP मिलता है?
हां, कई बैंक रहने वाली, कमर्शियल और किराए वाली प्रॉपर्टी पर LAP देते हैं, पर LTV और दर अलग हो सकती है।