इस कैलकुलेटर का इस्तेमाल कैसे करें
- एसेट की लागत भरें: खरीद कीमत और उसे चालू करने का खर्च।
- स्क्रैप वैल्यू डालें: उपयोगी जीवन के अंत में एसेट से कितना मिलने की उम्मीद है।
- उपयोगी जीवनकाल सालों में भरें और तरीका चुनें: स्ट्रेट-लाइन, डबल डिक्लाइनिंग बैलेंस या सम-ऑफ-द-ईयर्स डिजिट्स।
- पहले साल का डेप्रिसिएशन और कुल डेप्रिसिएशन पढ़ें, फिर टेबल में हर साल की बुक वैल्यू देखें।
डेप्रिसिएशन क्या मापता है
डेप्रिसिएशन (मूल्यह्रास) किसी लंबे समय तक चलने वाले एसेट, जैसे गाड़ी या मशीन, की लागत को उसके इस्तेमाल के सालों में बांटता है, बजाय पूरी कीमत को पहले दिन का खर्च मानने के। डेप्रिसिएबल बेस = लागत − स्क्रैप वैल्यू। बुक वैल्यू = लागत − अब तक का कुल डेप्रिसिएशन, और यह स्क्रैप वैल्यू से नीचे नहीं जाती।
स्ट्रेट-लाइन: D = (लागत − स्क्रैप वैल्यू) ÷ जीवनकाल- D = हर साल का डेप्रिसिएशन
- डबल डिक्लाइनिंग बैलेंस: D = बुक वैल्यू × 2 ÷ जीवनकाल, इतना ही कि बुक वैल्यू स्क्रैप पर रुके
- सम-ऑफ-द-ईयर्स डिजिट्स: D = (लागत − स्क्रैप वैल्यू) × बचा जीवनकाल ÷ (जीवनकाल × (जीवनकाल + 1) ÷ 2)
उपयोगी जीवनकाल इस बात का अनुमान है कि एसेट आपके काम का कितने साल रहेगा, ज़रूरी नहीं कि उसकी भौतिक उम्र। लैपटॉप आठ साल चल सकता है, पर काम के लिए शायद तीन साल ही।
उदाहरण: ₹5 लाख की मशीन, 5 साल
₹5,00,000 की मशीन, ₹50,000 स्क्रैप वैल्यू और 5 साल का उपयोगी जीवन लें। डेप्रिसिएबल बेस ₹4,50,000 है।
स्ट्रेट-लाइन (SLM) हर साल ₹90,000 लेता है। डबल डिक्लाइनिंग बैलेंस पहले साल ₹2,00,000, फिर ₹1,20,000, ₹72,000, ₹43,200 और आखिरी साल ₹14,800 लेता है, जिससे बुक वैल्यू ठीक ₹50,000 पर रुकती है। सम-ऑफ-द-ईयर्स डिजिट्स पहले साल ₹1,50,000 देता है, जो पांचवें साल घटकर ₹30,000 हो जाता है। तीनों का कुल ₹4,50,000 ही है।
तरीका कैसे चुनें
स्ट्रेट-लाइन सबसे आसान है और उन एसेट के लिए ठीक है जो हर साल लगभग बराबर काम देते हैं। बाकी दोनों तरीके खर्च को शुरुआती सालों में ज़्यादा रखते हैं, जो गाड़ियों और कंप्यूटर जैसे एसेट पर फिट बैठता है जिनकी वैल्यू शुरू में तेज़ी से गिरती है। भारत में आम बोलचाल का WDV (रिटन डाउन वैल्यू) तरीका भी इसी तरह हर साल बची बुक वैल्यू पर एक तय प्रतिशत लगाता है; डबल डिक्लाइनिंग बैलेंस उसका एक रूप है जिसमें दर 2 ÷ जीवनकाल होती है।
तरीका सिर्फ यह बदलता है कि खर्च कब दर्ज हो, कुल रकम नहीं। किताबों (कंपनी कानून) और इनकम टैक्स के लिए डेप्रिसिएशन के अपने अलग नियम और दरें होती हैं, इसलिए जो लागू है वह अपने CA से पुष्टि करें। जो तरीका एसेट की असली गिरावट से मेल खाए, उसे चुनें और लगातार अपनाएं।
टेबल का इस्तेमाल
- बुक वैल्यू की तुलना उस कीमत से करें जिस पर एसेट आज सच में बिक सकता है; इससे पता चलता है कि आपका जीवनकाल का अनुमान सही है या नहीं।
- सेवा या प्रोडक्ट की कीमत तय करते समय पहले साल के डेप्रिसिएशन को सालाना खर्च की तरह गिनें।
- चलाने के खर्च के साथ मिलाकर पेबैक पीरियड कैलकुलेटर से देखें कि खरीद कब वसूल होगी।
- गाड़ी खरीदने के बजाय लीज़ पर लेने का विकल्प हो तो कार लीज़ कैलकुलेटर से तुलना करें।
मान्यताएं और सीमाएं
कैलकुलेटर पूरे साल गिनता है और साल के बीच खरीद का कोई नियम नहीं लगाता। अधूरा पहला साल, इनकम टैक्स के ब्लॉक ऑफ एसेट्स जैसे टैक्स-विशेष नियम, अतिरिक्त डेप्रिसिएशन, इम्पेयरमेंट या जीवनकाल के अनुमान में बदलाव इसमें नहीं हैं। स्क्रैप वैल्यू अनुमान है और असली रकम अलग हो सकती है।
इसे योजना और समझ के लिए इस्तेमाल करें; टैक्स रिटर्न और बैलेंस शीट के लिए अपने CA पर भरोसा करें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
स्क्रैप (साल्वेज) वैल्यू क्या है?
उपयोगी जीवन के अंत में एसेट से मिलने वाली अनुमानित रकम। बुक वैल्यू इस तक पहुंचते ही डेप्रिसिएशन रुक जाता है।
स्ट्रेट-लाइन और डिक्लाइनिंग बैलेंस में क्या फर्क है?
स्ट्रेट-लाइन हर साल बराबर रकम खर्च में डालता है; डिक्लाइनिंग बैलेंस शुरुआती सालों में ज़्यादा और बाद में कम।
क्या तरीका बदलने से कुल डेप्रिसिएशन बदलता है?
नहीं। हर तरीका एसेट के जीवन में लागत माइनस स्क्रैप वैल्यू ही घटाता है; सिर्फ समय बदलता है।
बुक वैल्यू क्या है?
लागत माइनस अब तक का कुल डेप्रिसिएशन। यह हिसाब-किताब का आंकड़ा है और बाज़ार कीमत से अलग हो सकता है।
क्या इसे इनकम टैक्स डेप्रिसिएशन के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं?
सिर्फ अनुमान के लिए। इनकम टैक्स में एसेट की श्रेणी के हिसाब से तय दरें और अपने नियम हैं, इसलिए रिटर्न भरने से पहले CA या टैक्स प्रोफेशनल से जांचें।