इस कैलकुलेटर का इस्तेमाल कैसे करें
- लोन राशि और सालाना ब्याज दर डालें।
- जितने साल सिर्फ ब्याज भरना है, वह सिर्फ ब्याज की अवधि में लिखें।
- लोन की कुल अवधि डालें — इसमें सिर्फ ब्याज वाले साल भी शामिल हैं।
- सिर्फ ब्याज वाली किस्त, सिर्फ ब्याज अवधि के बाद EMI और सामान्य लोन की तुलना में अतिरिक्त ब्याज देखें।
इंटरेस्ट-ओनली लोन कैसे काम करता है
शुरुआती अवधि में आप सिर्फ ब्याज भरते हैं, मूलधन ज़रा भी नहीं घटता। उसके बाद पूरा मूलधन बची हुई कम अवधि में चुकाना पड़ता है, इसलिए EMI अचानक बढ़ जाती है।
सिर्फ ब्याज किस्त = P × r बाद की EMI = P · r(1 + r)^m ÷ ((1 + r)^m − 1)- P = लोन राशि
- r = मासिक दर (सालाना दर ÷ 12 ÷ 100)
- m = सिर्फ ब्याज वाली अवधि के बाद बचे महीने (कुल अवधि − सिर्फ ब्याज अवधि)
भारत में यह स्थिति अक्सर निर्माणाधीन प्रॉपर्टी में दिखती है: बिल्डर को किस्तों में पैसा जाता है और पज़ेशन तक बैंक सिर्फ ब्याज लेता है, जिसे प्री-EMI कहते हैं। कुछ बिज़नेस लोन और लोन अगेंस्ट प्रॉपर्टी में भी शुरू में सिर्फ ब्याज की सुविधा मिलती है।
उदाहरण: ₹50 लाख, 9%, 3 साल सिर्फ ब्याज, कुल 20 साल
पहले 3 साल किस्त ₹37,500 है — इसमें एक रुपया भी मूलधन नहीं घटता।
चौथे साल से बचे 17 साल में पूरे ₹50 लाख चुकाने हैं, इसलिए EMI ₹47,940.20 हो जाती है। यानी हर महीने ₹10,440.20 का उछाल।
पूरे लोन पर कुल ब्याज ₹61.30 लाख (₹61,29,799.80) बनता है। इसी लोन को पहले दिन से सामान्य EMI पर लेते तो EMI ₹44,986.30 होती और ब्याज ₹3.33 लाख (₹3,33,088.33) कम लगता।
यह विकल्प कब ठीक है, कब नहीं
सिर्फ ब्याज वाला दौर तब समझ में आता है जब उस समय आप किराया और प्री-EMI दोनों भर रहे हों, या आय जल्द बढ़ने वाली हो और बढ़ी हुई EMI आराम से संभाल सकें।
अगर बाद की EMI आपकी आय पर भारी पड़ेगी, तो जोखिम बड़ा है। बढ़ी हुई EMI को अपनी मासिक आय के अनुपात में DTI कैलकुलेटर से जांचें। कई बैंक पज़ेशन से पहले ही पूरी EMI शुरू करने का विकल्प देते हैं, जिससे कुल ब्याज घटता है।
कुल ब्याज घटाने के तरीके
- सिर्फ ब्याज वाली अवधि जितनी छोटी हो सके, रखें — हर अतिरिक्त साल का मतलब है एक और साल का पूरा ब्याज, बिना मूलधन घटे।
- उस दौरान भी जो बन सके, मूलधन में प्रीपेमेंट करें; असर लोन प्रीपेमेंट कैलकुलेटर से देखें।
- बिल्डर से पज़ेशन की तारीख लिखित में लें — देरी का मतलब है ज़्यादा महीने सिर्फ ब्याज।
- सामान्य EMI वाले विकल्प से तुलना के लिए होम लोन EMI कैलकुलेटर में वही राशि डालें।
- बढ़ी हुई EMI के लिए पहले से तैयारी करें: EMI में उछाल जितनी रकम सिर्फ ब्याज वाले दौर में ही हर महीने अलग बचाएं, ताकि बाद में बजट न बिगड़े और वह बचत प्रीपेमेंट में भी काम आए।
मान्यताएं और सीमाएं
कैलकुलेटर मानता है कि पूरी लोन राशि पहले दिन मिल गई और दर पूरी अवधि एक जैसी है। निर्माणाधीन प्रॉपर्टी में रकम किस्तों में डिसबर्स होती है, इसलिए असल प्री-EMI शुरू में कम और धीरे-धीरे बढ़ती है। फ्लोटिंग दर बदलने पर EMI या अवधि भी बदलेगी।
प्रोसेसिंग फीस, बीमा, टैक्स लाभ और बैंक के खास नियम इसमें शामिल नहीं हैं। अपने लोन की सटीक शर्तें बैंक के Key Facts Statement (KFS) में देखें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्री-EMI और EMI में क्या फर्क है?
प्री-EMI में सिर्फ उस रकम का ब्याज जाता है जो अब तक डिसबर्स हुई है। EMI में ब्याज और मूलधन दोनों होते हैं, और लोन धीरे-धीरे खत्म होता है।
क्या प्री-EMI में भरा ब्याज बेकार जाता है?
उससे मूलधन नहीं घटता, इसलिए कुल लागत बढ़ती है। उदाहरण में सामान्य लोन की तुलना में ₹3.33 लाख ज़्यादा ब्याज बना।
सिर्फ ब्याज वाली अवधि के बाद EMI क्यों बढ़ जाती है?
क्योंकि पूरा मूलधन अब कम सालों में चुकाना है। 20 साल का लोन असल में 17 साल की EMI बन जाता है।
क्या सिर्फ ब्याज भरते समय प्रीपेमेंट कर सकते हैं?
आमतौर पर हां; फ्लोटिंग रेट लोन पर व्यक्तिगत उधारकर्ताओं से प्रीपेमेंट पेनल्टी नहीं ली जा सकती। बैंक से पुष्टि करें कि प्रीपेमेंट मूलधन में ही जाएगा।