इस कैलकुलेटर का इस्तेमाल कैसे करें
- प्रति यूनिट लागत डालें: खरीद या बनाने का खर्च, शिपिंग और पैकिंग समेत।
- ग्राहक से लिया जाने वाला बिक्री मूल्य भरें (GST छोड़कर)।
- प्रॉफिट मार्जिन, मुनाफा और मार्कअप पढ़ें।
- टेबल में हर लक्ष्य मार्जिन के लिए ज़रूरी कीमत देखें, जैसे 50% मार्जिन के लिए कीमत।
मार्जिन और मार्कअप में फर्क
दोनों में मुनाफा एक ही है, बस आधार अलग है। मार्जिन मुनाफे को बिक्री मूल्य के प्रतिशत में दिखाता है, जबकि मार्कअप लागत के प्रतिशत में। ₹600 की चीज़ ₹1,000 में बेचें तो मुनाफा ₹400 है: बिक्री मूल्य का 40% (मार्जिन) और लागत का 66.67% (मार्कअप)।
यह फर्क न समझने से कीमत गलत तय होती है। कई दुकानदार 'लागत पर 40% जोड़ो' करके सोचते हैं कि 40% मार्जिन मिल रहा है, जबकि असल में मार्जिन सिर्फ लगभग 28.6% होता है।
फॉर्मूले
मार्जिन हमेशा 100% से कम रहता है, जबकि मार्कअप 100% से ज़्यादा भी हो सकता है। किसी लक्ष्य मार्जिन के लिए कीमत लागत को (1 − मार्जिन) से भाग देकर निकलती है।
मार्जिन = (बिक्री मूल्य − लागत) ÷ बिक्री मूल्य × 100- बिक्री मूल्य = प्रति यूनिट बिक्री कीमत (GST के बिना)
- लागत = प्रति यूनिट आपकी कुल लागत
- मार्कअप = (बिक्री मूल्य − लागत) ÷ लागत × 100
- लक्ष्य मार्जिन m के लिए कीमत = लागत ÷ (1 − m)
उदाहरण: ₹600 की लागत, ₹1,000 बिक्री मूल्य
प्रति यूनिट मुनाफा ₹400, प्रॉफिट मार्जिन 40% और मार्कअप 66.67%। अगर आप 50% मार्जिन चाहते हैं, तो कीमत ₹1,200 रखनी होगी।
प्रतियोगिता के कारण कीमत ₹900 रखें तो मार्जिन 33.33% (मार्कअप 50%) रह जाता है; ₹750 पर सिर्फ 20% मार्जिन और ₹150 मुनाफा। सेल या डिस्काउंट से पहले यह गणित ज़रूर देखें; डिस्काउंट का असर डिस्काउंट कैलकुलेटर से भी जांचें।
लक्ष्य मार्जिन टेबल का इस्तेमाल
टेबल हर लक्ष्य मार्जिन के लिए कीमत बताती है। पहले तय करें कि किराया, सैलरी, बिजली, मार्केटप्लेस कमीशन और विज्ञापन जैसे तय खर्च निकालने के बाद आपको कितना मार्जिन चाहिए, फिर टेबल से कीमत चुनें और देखें कि बाज़ार में वह कीमत चल सकती है या नहीं।
कितनी यूनिट बेचकर सारे तय खर्च निकल आएंगे, यह ब्रेक-ईवन कैलकुलेटर से निकालें।
मार्जिन सुधारने के तरीके
- सप्लायर से बड़ी मात्रा पर बेहतर रेट या लंबा उधार मांगें।
- पैकिंग, शिपिंग और रिटर्न की असली लागत हर ऑर्डर पर गिनें; ऑनलाइन बिक्री में यहीं मार्जिन गायब होता है।
- कम मार्जिन वाले उत्पादों के साथ ज़्यादा मार्जिन वाले उत्पाद (कॉम्बो, एक्सेसरीज़) बेचें।
- हर उत्पाद का मार्जिन अलग देखें; औसत में घाटे वाला उत्पाद छिप जाता है।
- पूरे बिज़नेस का रिटर्न ROI कैलकुलेटर से देखें।
अनुमान और सीमाएं
यह प्रति यूनिट ग्रॉस मार्जिन है। किराया, सैलरी, विज्ञापन, ब्याज और इनकम टैक्स जैसे तय खर्च इसमें नहीं हैं, इसलिए नेट प्रॉफिट मार्जिन इससे कम होगा। GST ग्राहक से लेकर सरकार को जमा किया जाता है; अगर आप GST में पंजीकृत हैं तो लागत और बिक्री मूल्य दोनों GST के बिना डालें।
GST के नियम और दरें आधिकारिक स्रोत या अपने CA से जानें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रॉफिट मार्जिन कैसे निकालें?
(बिक्री मूल्य − लागत) ÷ बिक्री मूल्य × 100। ₹600 की चीज़ ₹1,000 में बेचने पर मार्जिन 40% है।
मार्जिन और मार्कअप में क्या अंतर है?
मार्जिन मुनाफे को बिक्री मूल्य से भाग देता है, मार्कअप लागत से। इसलिए एक ही सौदे में मार्कअप हमेशा मार्जिन से बड़ा होता है।
अच्छा प्रॉफिट मार्जिन कितना होता है?
यह उद्योग पर निर्भर है: किराना जैसे तेज़ बिकने वाले सामान में मार्जिन कम और ब्रांडेड या सर्विस बिज़नेस में ज़्यादा होता है। अपने सारे तय खर्च निकालने के बाद मुनाफा बचे, यही असली कसौटी है।
क्या बिक्री मूल्य में GST शामिल करें?
अगर आप GST में पंजीकृत हैं, तो नहीं; GST आपकी कमाई नहीं है। पंजीकृत नहीं हैं और खरीद पर GST दिया है, तो वह आपकी लागत में जुड़ता है।
40% मार्जिन के लिए लागत पर कितना जोड़ें?
लागत को 0.6 से भाग दें, यानी लगभग 66.67% मार्कअप। ₹600 की लागत पर कीमत ₹1,000।