इस कैलकुलेटर का इस्तेमाल कैसे करें
- लोन राशि डालें, यानी जितना पैसा आप उधार ले रहे हैं।
- ऑफर में लिखी सालाना ब्याज दर और लोन अवधि महीनों में भरें।
- अगर बैंक प्रोसेसिंग फीस लेता है तो उसे अग्रिम फीस में लोन के प्रतिशत के रूप में डालें।
- मासिक EMI, कुल ब्याज और प्रभावी APR पढ़ें और अलग-अलग ऑफर की तुलना करें।
EMI का फॉर्मूला
भारत में बैंक और NBFC ज़्यादातर पर्सनल लोन घटते बकाये (reducing balance) पर देते हैं: हर महीने की EMI बराबर रहती है, उसमें से पहले बचे हुए बकाये का ब्याज कटता है और बाकी मूलधन घटाता है। इसलिए शुरुआती EMI में ब्याज ज़्यादा और आखिरी EMI में मूलधन ज़्यादा होता है।
EMI = P · r / (1 − (1 + r)^−n)- EMI = मासिक किस्त
- P = लोन राशि
- r = मासिक ब्याज दर (सालाना दर ÷ 12 ÷ 100)
- n = किस्तों की संख्या (महीने)
EMI इस फॉर्मूले से निकलती है। ध्यान दें कि दर हमेशा मासिक दर में बदली जाती है।
उदाहरण: ₹5 लाख, 12% पर 5 साल
₹5,00,000 का पर्सनल लोन 12% सालाना ब्याज पर 60 महीने के लिए लें तो EMI ₹11,122 बनती है। 60 किस्तों में आप कुल ₹6,67,333 चुकाएंगे, जिसमें ₹1,67,333 ब्याज है।
अब यही लोन 36 महीने में चुकाएं: EMI बढ़कर ₹16,607 हो जाती है, लेकिन कुल ब्याज घटकर लगभग ₹97,858 रह जाता है। यानी कम अवधि में हर महीने ज़्यादा देना पड़ता है, पर कुल ब्याज काफी घट जाता है।
प्रोसेसिंग फीस असल में कितनी महंगी है
प्रोसेसिंग फीस आमतौर पर लोन राशि से काट ली जाती है, यानी आपके खाते में कम पैसा आता है पर EMI पूरी राशि पर भरनी होती है। ऊपर के उदाहरण में 2% फीस का मतलब है ₹10,000 कम हाथ में आना। इससे लोन की असली लागत, यानी प्रभावी APR, 12% से बढ़कर 12.89% हो जाती है।
छोटी अवधि में यही फीस और भारी पड़ती है: 36 महीने के लोन पर प्रभावी APR 13.41% बनता है। इसलिए दो ऑफर की तुलना सिर्फ ब्याज दर से नहीं, बल्कि फीस समेत APR से करें। बैंक की Key Fact Statement में भी यह सालाना प्रतिशत दर (APR) दी जाती है।
नतीजे का इस्तेमाल कैसे करें
EMI को अपनी मासिक इन-हैंड सैलरी के सामने रखें। सारी EMI मिलाकर आय का कितना हिस्सा ले रही हैं, यह FOIR / डेट-टू-इनकम कैलकुलेटर से देखें। अगर EMI भरने के बाद ज़रूरी खर्च और बचत के लिए कम बचता है, तो राशि घटाएं या अवधि पर दोबारा सोचें।
हर महीने ब्याज और मूलधन कैसे बंटता है, यह लोन एमॉर्टाइज़ेशन कैलकुलेटर में पूरी टेबल के साथ दिखता है। बीच में पैसा आए तो प्रीपेमेंट कैलकुलेटर से देखें कि कितनी जल्दी लोन खत्म हो सकता है।
सस्ता उधार लेने के तरीके
- जितनी ज़रूरत हो उतना ही लें; 'प्री-अप्रूव्ड' ऑफर में दिखी पूरी लिमिट लेना ज़रूरी नहीं।
- अपना क्रेडिट स्कोर ठीक रखें; अच्छी रीपेमेंट हिस्ट्री वालों को अक्सर बेहतर दर मिलती है।
- कम से कम दो-तीन बैंकों या NBFC से लिखित ऑफर लें और फीस समेत तुलना करें।
- फोरक्लोज़र या प्रीपेमेंट चार्ज पहले से पूछें, ताकि बाद में जल्दी चुकाना महंगा न पड़े।
- लोन के साथ जोड़ा गया बीमा वैकल्पिक है या नहीं, यह स्पष्ट रूप से पूछें।
अनुमान और सीमाएं
कैलकुलेटर पूरी अवधि में स्थिर दर और बराबर मासिक EMI मानता है। फ्लैट रेट लोन, जहां ब्याज पूरे मूल राशि पर लगता है, इससे काफी महंगे होते हैं और यहां मॉडल नहीं किए गए। GST, स्टांप ड्यूटी, लेट पेमेंट चार्ज और बीमा प्रीमियम भी शामिल नहीं हैं।
अंतिम आंकड़े आपके लोन एग्रीमेंट और Key Fact Statement के ही मानें। यहां के नतीजे योजना और तुलना के लिए हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
₹5 लाख के पर्सनल लोन की EMI कितनी होगी?
12% पर 5 साल के लिए लगभग ₹11,122 और 3 साल के लिए करीब ₹16,607। अपनी दर और अवधि डालकर सटीक आंकड़ा देखें।
ब्याज दर और APR में क्या फर्क है?
ब्याज दर सिर्फ उधार पर लगने वाला ब्याज है। APR में प्रोसेसिंग फीस जैसे अग्रिम खर्च भी जुड़ जाते हैं, इसलिए यह लोन की असली सालाना लागत बेहतर दिखाता है।
लंबी अवधि लेना बेहतर है या छोटी?
लंबी अवधि में EMI कम लेकिन कुल ब्याज ज़्यादा होता है। वह सबसे छोटी अवधि चुनें जिसकी EMI आप बिना तनाव के भर सकें।
फ्लैट रेट वाले लोन पर यह कैलकुलेटर सही है?
नहीं। फ्लैट रेट में ब्याज पूरी मूल राशि पर पूरे समय लगता है, जिससे असली दर बताई गई दर से काफी ऊंची हो जाती है। ऐसे ऑफर को घटते बकाये वाली दर में बदलवाकर तुलना करें।
क्या EMI बीच में बदल सकती है?
फिक्स्ड रेट लोन में नहीं। फ्लोटिंग रेट लोन में दर बदलने पर बैंक EMI या अवधि बदल सकता है।