इस कैलकुलेटर का इस्तेमाल कैसे करें
- बैंक स्टेटमेंट से मौजूदा लोन बकाया डालें।
- अभी की ब्याज दर और लोन के बाकी साल भरें।
- EMI के ऊपर जितना हर महीने और दे सकते हैं, वह हर महीने अतिरिक्त भुगतान में डालें।
- बचा हुआ ब्याज, बचा समय और नई मासिक EMI पढ़ें, और ग्राफ में दोनों बकाया रेखाओं की तुलना करें।
अतिरिक्त भुगतान इतना असर क्यों करता है
हर महीने ब्याज बचे हुए बकाये पर लगता है। EMI के ऊपर दिया गया हर रुपया सीधे मूलधन घटाता है, इसलिए अगले महीने से उस रुपये पर ब्याज नहीं लगता। यह बचत हर महीने दोहराई जाती है, और लोन जितना लंबा बचा हो, असर उतना बड़ा।
B_k = B_(k−1) · (1 + r) − (EMI + E), जब तक B_k ≤ 0 न हो- B_k = k-वें महीने के बाद बकाया
- r = मासिक ब्याज दर (सालाना दर ÷ 12 ÷ 100)
- EMI = बाकी अवधि के लिए सामान्य किस्त
- E = हर महीने का अतिरिक्त भुगतान
कैलकुलेटर पहले बाकी अवधि के लिए सामान्य EMI निकालता है, फिर महीने-दर-महीने बकाया घटाता है जब तक वह शून्य न हो जाए।
उदाहरण: ₹30 लाख बकाया, 8.5%, 15 साल बाकी
सामान्य EMI ₹29,542 है और बिना प्रीपेमेंट के बाकी ब्याज लगभग ₹23.18 लाख। हर महीने सिर्फ ₹5,000 ज़्यादा भरें (कुल ₹34,542), तो लोन 136 महीने में खत्म होता है, यानी 44 महीने पहले। ब्याज घटकर लगभग ₹16.74 लाख रह जाता है और ₹6.44 लाख की बचत होती है।
अतिरिक्त भुगतान ₹10,000 करें तो बचत करीब ₹9.99 लाख और समय की बचत 70 महीने हो जाती है।
छोटा लोन, छोटा असर
₹10 लाख का लोन जिसमें 5 साल बाकी हैं, उस पर भी ₹5,000 अतिरिक्त डालें: बचत सिर्फ लगभग ₹55,460 और 13 महीने की होती है। कारण साफ है: बकाया छोटा है और ब्याज लगने के लिए समय कम बचा है।
इसलिए प्रीपेमेंट लोन के शुरुआती सालों में सबसे ज़्यादा फायदा देता है, जब EMI का बड़ा हिस्सा ब्याज में जा रहा होता है। यह बंटवारा लोन एमॉर्टाइज़ेशन कैलकुलेटर की टेबल में साफ दिखता है।
प्रीपेमेंट करें या कहीं और लगाएं?
प्रीपेमेंट पर आपका रिटर्न लोन की ब्याज दर के बराबर है, बिना जोखिम के। अगर पहले से कोई महंगा कर्ज़ है, जैसे क्रेडिट कार्ड, तो पहले उसे चुकाएं; क्रेडिट कार्ड पेऑफ कैलकुलेटर से देखें। उसके बाद इमरजेंसी फंड पूरा रखें।
होम लोन पर टैक्स छूट मिल रही हो तो असली ब्याज लागत थोड़ी कम हो सकती है। लंबी अवधि के निवेश से तुलना करते समय याद रखें कि बाज़ार रिटर्न तय नहीं होता, जबकि प्रीपेमेंट की बचत तय है।
एक व्यावहारिक तरीका: हर साल सैलरी बढ़ने पर EMI के ऊपर की अतिरिक्त राशि थोड़ी बढ़ा दें। इससे बजट पर अचानक बोझ नहीं पड़ता और लोन धीरे-धीरे काफी पहले खत्म हो जाता है।
काम की बातें
- बैंक से लिखित में कहें कि अतिरिक्त राशि मूलधन में लगे और अवधि घटे, सिर्फ अगली EMI एडवांस न हो।
- बैंक अक्सर पूछते हैं कि EMI घटाएं या अवधि; अवधि घटाने से ब्याज ज़्यादा बचता है।
- प्रीपेमेंट चार्ज की शर्तें लोन एग्रीमेंट में देखें, खासकर फिक्स्ड रेट लोन में।
- हर महीने तय राशि की जगह साल में एक बार बोनस से एकमुश्त प्रीपेमेंट भी कर सकते हैं।
- हर प्रीपेमेंट के बाद नया रीपेमेंट शेड्यूल मांगें।
अनुमान और सीमाएं
कैलकुलेटर स्थिर ब्याज दर और हर महीने बराबर अतिरिक्त भुगतान मानता है। फ्लोटिंग रेट में दर बदलेगी, और बैंक दिनों के हिसाब से ब्याज जोड़ते हैं, इसलिए असली आंकड़े थोड़े अलग होंगे। प्रीपेमेंट चार्ज और टैक्स असर शामिल नहीं हैं।
अंतिम बकाया और नई अवधि के लिए बैंक का स्टेटमेंट ही मानें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रीपेमेंट से EMI घटाएं या अवधि?
अवधि घटाने से कुल ब्याज ज़्यादा बचता है। EMI घटाना तब ठीक है जब हर महीने का बोझ कम करना ज़्यादा ज़रूरी हो।
क्या होम लोन पर प्रीपेमेंट चार्ज लगता है?
यह लोन के प्रकार और बैंक की शर्तों पर निर्भर है। अपने लोन एग्रीमेंट या Key Fact Statement में देखें, या बैंक से लिखित में पूछें।
हर महीने थोड़ा या साल में एक बार ज़्यादा, कौन बेहतर?
कुल रकम बराबर हो तो जितना जल्दी पैसा मूलधन में जाए, उतना ज़्यादा ब्याज बचता है। फर्क ज़्यादा बड़ा नहीं होता, इसलिए जो आपके लिए आसान हो वही करें।
क्या यह कार या पर्सनल लोन के लिए भी चलेगा?
हां, किसी भी बराबर EMI वाले लोन के लिए। बस बाकी अवधि सालों में डालें और बकाया अपने ताज़ा स्टेटमेंट से लें।