इस कैलकुलेटर का इस्तेमाल कैसे करें
- उस अवधि (महीना या साल) की बिक्री राशि भरें।
- कमीशन दर प्रतिशत में और उसी अवधि का मूल वेतन (फिक्स्ड सैलरी) डालें।
- अगर टारगेट पूरा होने के बाद ही कमीशन मिलता है, तो वह रकम कमीशन इसके बाद शुरू में भरें; नहीं तो 0 रखें।
- कमीशन, कुल वेतन और कुल बिक्री पर प्रभावी दर पढ़ें।
कमीशन कैसे निकलता है
सीधा कमीशन बिक्री का एक प्रतिशत होता है। अगर टारगेट (कोटा) लागू है, तो सिर्फ उसके ऊपर की बिक्री गिनी जाती है। कुल कमाई = फिक्स्ड सैलरी + कमीशन।
कमीशन = max(0, बिक्री − टारगेट) × दर ÷ 100- बिक्री = उस अवधि में बेची गई कुल रकम
- टारगेट = वह बिक्री जिसके बाद कमीशन शुरू होता है (न हो तो 0)
- दर = कमीशन प्रतिशत
- कुल कमाई = फिक्स्ड सैलरी + कमीशन
प्रभावी दर कमीशन को पूरी बिक्री से भाग देकर निकलती है। टारगेट होने पर यह बताई गई दर से हमेशा कम होती है, क्योंकि बिक्री का एक हिस्सा कुछ नहीं कमाता।
उदाहरण: ₹5 लाख की बिक्री पर 5%
महीने में ₹5,00,000 की बिक्री, 5% कमीशन और ₹25,000 फिक्स्ड सैलरी पर कमीशन ₹25,000 बनता है और कुल कमाई ₹50,000। कमाई का 50% कमीशन है, यानी आधी आय बिक्री के साथ ऊपर-नीचे होगी।
अब ₹2,00,000 का टारगेट जोड़ें। सिर्फ ₹3,00,000 पर कमीशन बनता है, इसलिए कमीशन घटकर ₹15,000 और कुल कमाई ₹40,000 रह जाती है। पूरी बिक्री पर प्रभावी दर 3% है, 5% नहीं।
कमीशन प्लान को कैसे परखें
ऊंची दर अपने आप बेहतर नहीं होती। प्लान की तुलना उस बिक्री स्तर पर कुल कमाई से करें जो आप सच में हासिल कर सकते हैं, सबसे अच्छे केस से नहीं। यह भी देखें कि कमाई का कितना हिस्सा कमीशन पर टिका है: यह जितना बड़ा, महीने-दर-महीने आय उतनी ज़्यादा डगमगाएगी, और EMI या किराया जैसी तय ज़िम्मेदारियों पर दबाव आएगा।
अलग फिक्स्ड सैलरी और दर वाले ऑफर की तुलना करनी हो तो हर प्लान को कम, सामान्य और अच्छी बिक्री पर चलाएं। नतीजे को सालाना आंकड़े और काम के प्रति घंटे की दर में घंटे से सैलरी कैलकुलेटर से बदलें।
प्लान स्वीकार करने से पहले पूछें
- क्या दर तय है, या बिक्री बढ़ने पर स्लैब के हिसाब से बदलती है?
- कमीशन बिक्री पर बनता है, मुनाफे पर, या ग्राहक से पैसा आने पर?
- रिफंड, कैंसलेशन या देर से भुगतान करने वाले ग्राहकों पर कमीशन का क्या होता है?
- क्या कमीशन का एडवांस मिलता है जो टारगेट न होने पर लौटाना पड़ सकता है?
- क्या कमीशन पर कोई ऊपरी सीमा है, या साल के बीच प्लान बदलने की शर्त है?
मान्यताएं और सीमाएं
कैलकुलेटर एक तय दर और एक वैकल्पिक टारगेट मानता है। स्लैब या एक्सेलरेटर दरें, ऊपरी सीमा, एडवांस, क्लॉबैक या टीम में बंटवारा इसमें नहीं हैं, और इनकम टैक्स, TDS या PF कटौती भी नहीं गिनी जाती। इसलिए हाथ में आने वाली रकम दिखाए गए कुल से कम होगी।
फिक्स्ड सैलरी के ऊपर ओवरटाइम मिलता है तो ओवरटाइम कैलकुलेटर देखें। कमीशन कैसे गिना जाएगा, इस पर अंतिम शब्द आपके लिखित ऑफर लेटर या एजेंसी एग्रीमेंट का है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
कमीशन कैसे निकालें?
बिक्री राशि को कमीशन दर से गुणा करें। अगर टारगेट है, तो पहले बिक्री से टारगेट घटाएं और सिर्फ बची रकम पर दर लगाएं।
प्रभावी कमीशन दर क्या है?
कमीशन को कुल बिक्री से भाग देने पर मिलने वाली दर। टारगेट होने पर यह बताई गई दर से कम होती है, क्योंकि बिक्री का एक हिस्सा कुछ नहीं कमाता।
कमीशन टैक्स से पहले का है या बाद का?
बताई गई रकम टैक्स से पहले की है। टैक्स और दूसरी कटौतियों के बाद हाथ में कम आता है।
रियल एस्टेट ब्रोकरेज के लिए भी चलेगा?
हां, डील वैल्यू को बिक्री राशि और ब्रोकरेज प्रतिशत को कमीशन दर में डालें, फिक्स्ड सैलरी 0 रखें। ब्रोकरेज पर लगने वाला GST इसमें शामिल नहीं है।
क्या मासिक और सालाना दोनों आंकड़े डाल सकते हैं?
हां, बस बिक्री और फिक्स्ड सैलरी एक ही अवधि की डालें, महीने की या साल की; नतीजे उसी अवधि के होंगे।