इस कैलकुलेटर का इस्तेमाल कैसे करें
- टैग पर लिखी MRP या पहले की कीमत मूल कीमत में डालें।
- सेल की मुख्य छूट छूट में प्रतिशत में लिखें।
- कूपन, बैंक ऑफर या ‘एक्स्ट्रा ऑफ’ हो तो उसे अतिरिक्त छूट में डालें — यह पहली छूट के बाद वाली कीमत पर लगती है।
- अगर बिल पर टैक्स अलग से जुड़ना है तो सेल्स टैक्स / GST भरें, वरना 0 रखें। फिर अंतिम कीमत, आपकी बचत और कुल छूट देखें।
डिस्काउंट का हिसाब कैसे लगता है
पहली छूट मूल कीमत पर लगती है। दूसरी छूट (कूपन, बैंक कार्ड ऑफर) आमतौर पर पहले से घटी हुई कीमत पर लगती है, मूल कीमत पर नहीं। इसलिए 40% और 10% को जोड़कर 50% मान लेना गलत है।
अंतिम कीमत = P × (1 − d₁) × (1 − d₂) × (1 + t)- P = मूल कीमत (MRP या पहले की कीमत)
- d₁ = मुख्य छूट, दशमलव में (40% = 0.40)
- d₂ = अतिरिक्त छूट, दशमलव में
- t = बिल पर अलग से जुड़ने वाला टैक्स (MRP वाले सामान में आमतौर पर 0)
- कुल छूट = 1 − (1 − d₁) × (1 − d₂)
अगर टैक्स अलग से जुड़ता है, तो वह छूट के बाद वाली कीमत पर लगता है।
उदाहरण: ₹4,000 का जूता, 40% + 10% ऑफ
मूल कीमत ₹4,000, सेल छूट 40% और ऐप कूपन से 10% अतिरिक्त। कैलकुलेटर के अनुसार अंतिम कीमत ₹2,160 है और आपकी बचत ₹1,840।
असली कुल छूट 46% बनती है, 50% नहीं। फर्क इसलिए है क्योंकि 10% की दूसरी छूट ₹4,000 पर नहीं, बल्कि 40% घटने के बाद बची कीमत पर लगी।
यहां टैक्स 0 रखा गया है, क्योंकि भारत में दुकान या ऑनलाइन पर दिखने वाली MRP और सेल प्राइस में GST पहले से शामिल होता है।
GST और MRP: कब टैक्स जोड़ें
रिटेल में छपी MRP टैक्स सहित होती है, इसलिए ज़्यादातर खरीदारी में सेल्स टैक्स / GST 0 रखें। लेकिन कुछ जगह कीमत ‘+ GST’ लिखकर बताई जाती है — जैसे B2B कोटेशन, कुछ सर्विस, होटल या फर्नीचर के ऑर्डर। वहां छूट के बाद GST जुड़ेगा, तो उसकी दर भरें।
बिल में से GST अलग करना हो या टैक्स सहित कीमत निकालनी हो, तो GST कैलकुलेटर इस्तेमाल करें।
सेल में सही फैसला कैसे लें
- रुपये में बचत देखें, सिर्फ प्रतिशत नहीं: महंगे सामान पर 10% भी ज़्यादा पैसे बचाता है।
- ‘पहले की कीमत’ असली है या नहीं, यह कुछ दिन पहले के दाम से मिलाएं।
- डिलीवरी चार्ज, कन्वीनियंस फीस और नो-कॉस्ट EMI की प्रोसेसिंग फीस जोड़कर कुल कीमत देखें।
- बैंक ऑफर में अक्सर अधिकतम छूट की सीमा होती है; शर्तें पढ़ें।
- अगर सामान बजट से बाहर था, तो छूट भी खर्च ही है — बजट कैलकुलेटर से देखें कि यह महीने के खर्च में फिट होता है या नहीं।
दुकानदारों के लिए: छूट का मार्जिन पर असर
अगर आप बेचने वाले हैं, तो याद रखें कि छूट सीधी आपके मार्जिन से कटती है। कम मार्जिन वाले सामान पर बड़ी छूट मुनाफे का बड़ा हिस्सा खा जाती है, भले बिक्री बढ़ जाए। छूट तय करने से पहले प्रॉफिट मार्जिन कैलकुलेटर से नया मार्जिन देखें।
मान्यताएं और सीमाएं
कैलकुलेटर मानता है कि अतिरिक्त छूट पहली छूट के बाद वाली कीमत पर लगती है और टैक्स आख़िर में। कुछ ऑफर अलग तरीके से काम करते हैं — जैसे ‘₹500 फ्लैट ऑफ’, कैशबैक जो बाद में मिलता है, या ‘दो खरीदो एक फ्री’। ऐसे ऑफर के लिए उसे प्रतिशत में बदलकर डालें या अलग से हिसाब लगाएं।
दरें और कीमतें आप खुद डालते हैं; कैलकुलेटर किसी दुकान की असली कीमत की पुष्टि नहीं करता।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
40% + 10% छूट कुल कितनी होती है?
46%, क्योंकि दूसरी छूट घटी हुई कीमत पर लगती है। ₹4,000 की चीज़ ₹2,160 की पड़ती है।
डिस्काउंट प्रतिशत कैसे निकालें?
(मूल कीमत − सेल कीमत) ÷ मूल कीमत × 100। उदाहरण वाली ₹4,000 की चीज़ ₹2,160 में मिल रही है तो कुल छूट 46% है।
क्या डिस्काउंट GST से पहले लगता है या बाद में?
अगर छूट बिल पर ही दी गई है, तो GST आमतौर पर छूट के बाद वाली कीमत पर लगता है। MRP वाले सामान में GST पहले से कीमत में शामिल रहता है।
कैशबैक और इंस्टेंट डिस्काउंट में क्या फर्क है?
इंस्टेंट डिस्काउंट बिल पर ही कीमत घटा देता है। कैशबैक बाद में वॉलेट या खाते में आता है और अक्सर शर्तों के साथ — इसे बचत तभी मानें जब पैसा सच में मिल जाए।