इस कैलकुलेटर का इस्तेमाल कैसे करें
- सिर्फ ज़रूरी खर्च (किराया/EMI, राशन, बिजली, स्कूल फीस, बीमा प्रीमियम) जोड़कर ज़रूरी मासिक खर्च में डालें।
- कवर के महीने चुनें, जैसे 6।
- इस काम के लिए जो पैसा पहले से है, उसे पहले से बचत में और आप हर महीने बचा सकते हैं में मासिक बचत डालें।
- इमरजेंसी फंड लक्ष्य, अभी बचाना बाकी और लक्ष्य तक पहुंचने का समय पढ़ें।
लक्ष्य में क्या गिनें
इमरजेंसी फंड पूरी जीवनशैली के लिए नहीं, सिर्फ उन खर्चों के लिए है जो रोके नहीं जा सकते: किराया या होम लोन EMI, बाकी EMI, राशन, बिजली-पानी, फोन, बच्चों की फीस, दवाइयां और बीमा प्रीमियम। बाहर खाना, शॉपिंग और घूमना संकट में रोके जा सकते हैं।
लक्ष्य = ज़रूरी खर्च × महीने; बाकी = लक्ष्य − बचत; लगने वाले महीने = बाकी / मासिक बचत (ऊपर की ओर पूर्णांक)- ज़रूरी खर्च = सिर्फ वे बिल जो टाले नहीं जा सकते
- महीने = कितने समय का कवर चाहिए
- बचत = इस काम के लिए पहले से अलग रखा पैसा
- मासिक बचत = हर महीने जोड़ी जाने वाली रकम
कैलकुलेटर लक्ष्य, बाकी रकम और मासिक बचत से लगने वाला समय निकालता है।
उदाहरण: ₹40,000 मासिक ज़रूरी खर्च
6 महीने का कवर चाहिए तो लक्ष्य ₹2,40,000 है। ₹50,000 पहले से है, जो आज सिर्फ 1.25 महीने का खर्च है, और ₹1,90,000 अभी बचाना बाकी है।
हर महीने ₹10,000 बचाने पर फंड 19 महीने में तैयार होगा; ₹20,000 बचाने पर 10 महीने में। पहला पड़ाव 3 महीने का न्यूनतम कवर, यानी ₹1,20,000, ₹10,000 महीने की बचत से 7 महीने में आ जाएगा।
कितने महीने का कवर चुनें
- 3 महीने: स्थिर सरकारी या पक्की नौकरी, घर में दो कमाने वाले, और अच्छा हेल्थ इंश्योरेंस।
- 6 महीने: ज़्यादातर नौकरीपेशा परिवारों के लिए एक संतुलित लक्ष्य।
- 9-12 महीने: अकेले कमाने वाले, बिज़नेस या फ्रीलांस आय, कमीशन आधारित काम, या घर में बुज़ुर्गों और बच्चों की ज़िम्मेदारी।
- बिना हेल्थ इंश्योरेंस के इलाज का जोखिम भी इसी फंड पर आता है, इसलिए पहले एक हेल्थ पॉलिसी पर विचार करें।
फंड जल्दी बनाएं और सुरक्षित रखें
सैलरी आते ही एक तय रकम अलग खाते या स्वीप-इन FD में ऑटो ट्रांसफर करें। बोनस, टैक्स रिफंड या त्योहार पर मिले पैसे का एक हिस्सा सीधे इसमें डालें। हर महीने कितनी जगह बनती है, यह बजट कैलकुलेटर से देखें।
यह पैसा जल्दी निकल सके और उसकी कीमत न गिरे, यह सबसे ज़रूरी है: सेविंग्स खाता, स्वीप-इन FD या छोटी अवधि की FD जैसे विकल्प। शेयर में रखा इमरजेंसी फंड ठीक उसी समय गिर सकता है जब आपको उसकी ज़रूरत हो। प्रभावी ब्याज की तुलना प्रभावी सालाना दर कैलकुलेटर से करें।
अगर क्रेडिट कार्ड का महंगा बकाया है, तो पहले छोटा फंड (जैसे एक महीने का) बनाकर कार्ड चुकाएं; योजना क्रेडिट कार्ड पेऑफ कैलकुलेटर से बनाएं।
कम आय में भी शुरुआत की जा सकती है। मान लीजिए ज़रूरी खर्च ₹25,000 महीना है और आप हर महीने ₹5,000 बचा सकते हैं: 6 महीने का लक्ष्य ₹1,50,000 है और उसमें 30 महीने लगेंगे। यह लंबा लगता है, लेकिन पहला महीना पूरा होते ही आप पहले से ज़्यादा सुरक्षित हैं; छोटे पड़ावों पर ध्यान दें।
कैलकुलेटर की सीमाएं
कैलकुलेटर ब्याज नहीं जोड़ता और मानता है कि आप हर महीने बराबर बचाएंगे और बीच में पैसा नहीं निकालेंगे। महंगाई के साथ ज़रूरी खर्च बढ़ते हैं, इसलिए साल में एक बार लक्ष्य दोबारा जांचें।
इस्तेमाल के बाद फंड को फिर से भरना न भूलें।
इमरजेंसी फंड को किसी लक्ष्य, जैसे छुट्टी या गाड़ी, के पैसे से अलग रखें। नियोजित खर्च इमरजेंसी नहीं है; उसके लिए बचत लक्ष्य कैलकुलेटर से अलग योजना बनाएं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
इमरजेंसी फंड कितना होना चाहिए?
आम तौर पर 3 से 6 महीने के ज़रूरी खर्च, और अस्थिर आय या अकेले कमाने वाले के लिए उससे ज़्यादा।
इमरजेंसी फंड कहां रखें?
जहां तुरंत मिल सके और मूल रकम सुरक्षित रहे, जैसे सेविंग्स खाता, स्वीप-इन FD या लिक्विड विकल्प। जोखिम वाले निवेश में न रखें।
क्या इमरजेंसी फंड और निवेश साथ-साथ कर सकते हैं?
हां, लेकिन पहले कम से कम 3 महीने का फंड बनाना समझदारी है, ताकि किसी संकट में निवेश घाटे में न बेचना पड़े।
क्या हेल्थ इंश्योरेंस हो तो छोटा फंड चल जाएगा?
इंश्योरेंस इलाज का बड़ा खर्च संभालता है, नौकरी जाने का नहीं। इसलिए बीमा होने पर भी कुछ महीनों का खर्च अलग रखें।