इस कैलकुलेटर का इस्तेमाल कैसे करें
- कुल एजुकेशन लोन लोन राशि में और सालाना दर ब्याज दर में डालें।
- कोर्स की अवधि और उसके बाद की छूट मिलाकर मोरेटोरियम रीपेमेंट शुरू होने से पहले के महीने में लिखें (बिना चुकाया ब्याज बकाया में जुड़ता है)।
- EMI कितने साल चलेगी, वह रीपेमेंट अवधि में भरें।
- अगर हर महीने EMI से ज़्यादा दे सकते हैं, तो हर महीने अतिरिक्त भुगतान भरें, फिर रीपेमेंट शुरू होने पर बकाया और मासिक EMI देखें।
मोरेटोरियम और EMI का हिसाब
मोरेटोरियम (पढ़ाई की अवधि और उसके बाद कुछ महीने) में आपको EMI नहीं भरनी होती, लेकिन ब्याज बनता रहता है। अगर आप वह ब्याज नहीं भरते, तो वह बकाये में जुड़ जाता है और EMI बड़ी रकम पर बनती है।
रीपेमेंट पर बकाया = P × (1 + r)^g EMI = B · r(1 + r)^n ÷ ((1 + r)^n − 1)- P = लोन राशि
- r = मासिक दर (सालाना ÷ 12 ÷ 100)
- g = मोरेटोरियम के महीने
- B = रीपेमेंट शुरू होने पर बकाया
- n = रीपेमेंट अवधि, महीनों में
कैलकुलेटर हर महीने का बिना चुकाया ब्याज बकाये में जोड़ता है, फिर रीपेमेंट शुरू होने पर बढ़े हुए बकाये पर सामान्य EMI निकालता है।
उदाहरण: ₹10 लाख, 10%, 4 साल का कोर्स + 6 महीने
आपने 4 साल के कोर्स के लिए ₹10 लाख का लोन लिया, दर 10%, और EMI कोर्स के 6 महीने बाद शुरू होगी — कुल 54 महीने का मोरेटोरियम।
इस दौरान ₹5.65 लाख (₹5,65,390.56) ब्याज जुड़ जाता है, और रीपेमेंट शुरू होने पर बकाया ₹15.65 लाख (₹15,65,390.56) होता है। 10 साल में इसकी EMI ₹20,686.75 बनती है और कुल ब्याज ₹14.82 लाख (₹14,82,410.19)।
अगर नौकरी लगने के बाद हर महीने ₹3,000 ज़्यादा दें, तो लोन 97 महीने में खत्म होता है और कुल ब्याज घटकर ₹12.84 लाख (₹12,83,765.82) रह जाता है।
कुल ब्याज घटाने के तरीके
- पढ़ाई के दौरान ही ब्याज भरें, चाहे परिवार की मदद से — तब बकाया नहीं बढ़ता और EMI काफ़ी छोटी रहती है।
- पूरी राशि एक साथ न लें; कई बैंक फीस के हिसाब से किस्तों में डिसबर्स करते हैं, और ब्याज सिर्फ निकली रकम पर लगता है।
- नौकरी लगते ही अतिरिक्त भुगतान शुरू करें; असर लोन प्रीपेमेंट कैलकुलेटर में भी देख सकते हैं।
- सरकारी ब्याज सब्सिडी योजनाओं और लड़कियों/मेधावी छात्रों के लिए दर में छूट के बारे में बैंक से पूछें।
- एजुकेशन लोन के ब्याज पर आयकर कटौती का प्रावधान है; पात्रता और शर्तें अपने CA से समझें।
नतीजा कैसे पढ़ें
EMI को अपनी अनुमानित शुरुआती सैलरी से मिलाएं। अगर EMI इन-हैंड सैलरी का बड़ा हिस्सा खा रही है, तो लोन राशि, कॉलेज या रीपेमेंट अवधि पर दोबारा सोचें। अपनी आय पर कुल कर्ज़ का बोझ DTI कैलकुलेटर से मापें।
लंबी रीपेमेंट अवधि EMI घटाती है, पर कुल ब्याज बढ़ाती है। अलग-अलग अवधि डालकर दोनों संख्याएं देखें। पूरी EMI तालिका के लिए लोन EMI कैलकुलेटर देखें।
मान्यताएं और सीमाएं
कैलकुलेटर मानता है कि पूरी लोन राशि पहले दिन मिली और मोरेटोरियम का ब्याज हर महीने बकाये में जुड़कर चक्रवृद्धि होता है। कई बैंक मोरेटोरियम में साधारण ब्याज लगाते हैं या किस्तों में पैसा देते हैं — तब असल ब्याज यहां दिखाए आंकड़े से कम होगा।
दर स्थिर मानी गई है, जबकि ज़्यादातर एजुकेशन लोन फ्लोटिंग दर पर होते हैं। प्रोसेसिंग फीस, बीमा, कोलैटरल और टैक्स लाभ शामिल नहीं हैं। अपने बैंक के सैंक्शन लेटर और KFS को अंतिम मानें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
एजुकेशन लोन की EMI कब शुरू होती है?
आमतौर पर कोर्स खत्म होने के कुछ महीने बाद या नौकरी लगने पर, जो पहले हो। सटीक मोरेटोरियम आपके बैंक की योजना पर निर्भर है।
क्या मोरेटोरियम में ब्याज लगता है?
हां, ज़्यादातर लोन में ब्याज पहले दिन से लगता है। अगर उसे नहीं भरा, तो वह बकाये में जुड़ जाता है।
पढ़ाई के दौरान सिर्फ ब्याज भरना फायदेमंद है?
हां, इससे बकाया नहीं बढ़ता। उदाहरण में मोरेटोरियम में ₹5.65 लाख ब्याज जुड़ा, जो बाद में EMI और कुल ब्याज दोनों बढ़ाता है।
क्या एजुकेशन लोन जल्दी चुका सकते हैं?
फ्लोटिंग रेट लोन पर व्यक्तिगत उधारकर्ताओं से RBI के निर्देशों के अनुसार प्रीपेमेंट पेनल्टी नहीं ली जा सकती। फिक्स्ड रेट या विदेशी लेंडर के लोन की शर्तें अलग हो सकती हैं।