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ROI (Return on Investment) कैलकुलेटर

किसी भी निवेश पर कुल कितने प्रतिशत कमाया या गंवाया, और अलग-अलग अवधि वाले निवेशों की तुलना के लिए सालाना औसत रिटर्न कितना बना, यह एक साथ देखें।

INR
INR
साल
निवेश पर रिटर्न (ROI)50%
निवेश पर रिटर्न (ROI)50%
लाभ या हानि
₹50,000
सालाना औसत रिटर्न
14.47%
पैसा कितने गुना
1.5×
  • निवेश की गई राशि₹1,00,00066.7%
  • लाभ₹50,00033.3%

इस कैलकुलेटर का इस्तेमाल कैसे करें

  1. निवेश की गई राशि में कुल लगाया गया पैसा डालें, फीस और चार्ज समेत।
  2. वापस मिली राशि में बेचने पर मिली रकम या आज की वैल्यू डालें, बीच में मिली आय (जैसे डिविडेंड, किराया) जोड़कर।
  3. होल्डिंग अवधि सालों में भरें।
  4. निवेश पर रिटर्न (ROI), लाभ या हानि और सालाना औसत रिटर्न पढ़ें।

ROI कैसे निकलता है

ROI बताता है कि लगाए गए पैसे पर कुल कितने प्रतिशत लाभ या हानि हुई। यह आसान है, लेकिन इसमें समय शामिल नहीं होता: 50% का रिटर्न 2 साल में और 10 साल में, दोनों एक जैसे दिखते हैं।

ROI = (वापस मिली − निवेश) ÷ निवेश × 100        सालाना = (वापस मिली ÷ निवेश)^(1/t) − 1
  • निवेश = कुल लगाया गया पैसा, फीस समेत
  • वापस मिली = अंतिम वैल्यू या बिक्री की रकम, बीच में मिली आय समेत
  • t = होल्डिंग अवधि, सालों में

इसलिए कैलकुलेटर सालाना औसत रिटर्न भी निकालता है, यानी वह स्थिर सालाना दर जिससे उतने सालों में उतनी ही बढ़त होती। इसे CAGR भी कहते हैं।

उदाहरण: एक ही 50%, दो अलग अवधि

₹1,00,000 लगाए और 3 साल बाद ₹1,50,000 मिले। ROI 50%, लाभ ₹50,000 और पैसा 1.5 गुना हुआ। सालाना औसत रिटर्न 14.47% बनता है।

अब वही ₹50,000 का लाभ 6 साल में हुआ हो: ROI अब भी 50% है, लेकिन सालाना औसत रिटर्न सिर्फ 6.99% है, जो कई बार सुरक्षित जमा विकल्पों के आसपास या उससे कम हो सकता है। इसलिए अलग अवधि वाले निवेशों की तुलना हमेशा सालाना रिटर्न से करें।

नेगेटिव नतीजे को कैसे पढ़ें

अगर ₹1,00,000 लगाकर 3 साल बाद ₹80,000 ही मिले, तो ROI −20%, हानि ₹20,000 और सालाना औसत रिटर्न −7.17% है। पैसा 0.8 गुना रह गया।

याद रखें कि नुकसान की भरपाई के लिए उससे ज़्यादा प्रतिशत लाभ चाहिए: 20% गिरने के बाद वापस बराबर आने के लिए बचे पैसे पर 25% बढ़त ज़रूरी है। शेयर के सौदे का शुद्ध लाभ फीस और टैक्स समेत शेयर प्रॉफिट कैलकुलेटर में देखें।

ROI सही कैसे निकालें

ROI को आसानी से बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया जा सकता है, इसलिए किसी और का बताया ROI देखें तो पूछें: इसमें कौन से खर्च गिने गए, अवधि कितनी थी, और क्या यह टैक्स से पहले है या बाद में। प्रॉपर्टी के मामले में रजिस्ट्री, मेंटेनेंस और किराया न मिलने वाले महीनों को भी गिनें।

  • निवेश में ब्रोकरेज, स्टांप ड्यूटी, रजिस्ट्रेशन, एंट्री चार्ज जैसे सारे खर्च जोड़ें।
  • बीच में मिली आय, जैसे डिविडेंड, ब्याज या किराया, वापस मिली राशि में जोड़ें।
  • अगर आपने अलग-अलग समय पर पैसा लगाया (जैसे SIP), तो यह साधारण ROI सही तस्वीर नहीं देता; वहां हर किस्त की तारीख मायने रखती है।
  • महंगाई के बाद असली कमाई देखें; महंगाई कैलकुलेटर बताता है कि क्रय शक्ति कितनी घटी।
  • दो रिटर्न की तुलना एक ही आधार पर करें: टैक्स से पहले या टैक्स के बाद, दोनों में एक जैसा।

ROI क्या नहीं बताता

ROI जोखिम नहीं दिखाता। 15% सालाना रिटर्न वाला निवेश बीच में आधा भी हो सकता था; FD का 7% उतार-चढ़ाव के बिना आता है। यह पिछले नतीजे को मापता है, भविष्य की गारंटी नहीं देता।

बहु-वर्षीय वृद्धि को और बारीकी से देखने के लिए CAGR कैलकुलेटर और पैसा दोगुना होने के समय के लिए 72 का नियम कैलकुलेटर इस्तेमाल करें। निवेश के फैसले से पहले SEBI-पंजीकृत सलाहकार से राय लेना समझदारी है।

ROI बिज़नेस के फैसलों में भी काम आता है, जैसे नई मशीन या विज्ञापन पर खर्च। वहां भी वही नियम है: सारी लागत गिनें, सारी अतिरिक्त कमाई गिनें, और अवधि का ध्यान रखें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

ROI का फॉर्मूला क्या है?

(वापस मिली राशि − निवेश) ÷ निवेश × 100। जैसे ₹1,00,000 पर ₹1,50,000 मिले तो ROI 50% है।

ROI और CAGR में क्या फर्क है?

ROI पूरी अवधि का कुल रिटर्न है; CAGR वह सालाना दर है जो उस रिटर्न को सालों में बांटती है। अलग अवधि वाले निवेशों की तुलना के लिए CAGR बेहतर है।

अच्छा ROI कितना माना जाता है?

कोई एक जवाब नहीं है। अपने रिटर्न की तुलना उतने ही जोखिम और अवधि वाले विकल्प से, और महंगाई से करें।

लोन में ROI का मतलब क्या है?

बैंकिंग में ROI को अक्सर Rate of Interest (ब्याज दर) के लिए भी लिखा जाता है। यह कैलकुलेटर Return on Investment, यानी निवेश पर रिटर्न के लिए है।

स्रोत और आगे पढ़ें

अंतिम समीक्षा 13 अक्टूबर 2026 · हम कैसे गणना करते हैं