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एन्युटी (मासिक पेंशन) कैलकुलेटर

रिटायरमेंट पर जमा फंड से हर महीने कितनी ‘पेंशन’ बन सकती है? यह कैलकुलेटर बताता है कि तय सालों तक हर महीने बराबर रकम निकालने पर, बचे पैसे पर रिटर्न मिलते हुए, कितनी मासिक आय संभव है।

INR
%
साल
मासिक भुगतान (पेआउट)₹38,122
मासिक भुगतान (पेआउट)₹38,122
सालाना भुगतान (पेआउट)
₹4,57,467
कुल भुगतान (पेआउट)
₹91,49,337
जिसमें निवेश की बढ़त
₹41,49,337
020 लाख40 लाख60 लाख13579111315171920
पूरी टेबल दिखाएं (20 पंक्तियां)
वर्षबकाया राशि
1₹48,78,035
2₹47,47,533
3₹46,07,896
4₹44,58,484
5₹42,98,613
6₹41,27,552
7₹39,44,516
8₹37,48,667
9₹35,39,109
10₹33,14,882
11₹30,74,959
12₹28,18,242
13₹25,43,554
14₹22,49,638
15₹19,35,148
16₹15,98,644
17₹12,38,584
18₹8,53,321
19₹4,41,088
20₹0.00

इस कैलकुलेटर का इस्तेमाल कैसे करें

  1. रिटायरमेंट पर उपलब्ध कुल रकम शुरुआती बैलेंस में डालें।
  2. बचे पैसे पर मिलने वाला अनुमानित रिटर्न सालाना रिटर्न में लिखें।
  3. कितने साल तक आय चाहिए, वह भुगतान के साल में भरें।
  4. मासिक भुगतान (पेआउट), सालाना भुगतान (पेआउट) और जिसमें निवेश की बढ़त देखें।

मासिक भुगतान का फॉर्मूला

यह EMI का उल्टा है। लोन में बैंक आपको रकम देता है और आप किस्तें भरते हैं; यहां आप फंड से हर महीने बराबर रकम लेते हैं, और बचा पैसा रिटर्न कमाता रहता है। अवधि के अंत में फंड ठीक शून्य हो जाता है।

मासिक भुगतान = B · r ÷ (1 − (1 + r)^−n)
  • B = शुरुआती बैलेंस (कॉर्पस)
  • r = मासिक रिटर्न = (1 + सालाना रिटर्न)^(1/12) − 1
  • n = कुल भुगतान के महीने (साल × 12)
  • निवेश की बढ़त = कुल भुगतान − शुरुआती बैलेंस

भुगतान हर महीने के अंत में माना गया है। सालाना रिटर्न को ऐसी मासिक दर में बदला जाता है जो 12 महीने में चक्रवृद्धि होकर ठीक उतना ही सालाना रिटर्न दे।

उदाहरण: ₹50 लाख, 7%, 20 साल

रिटायरमेंट पर आपके पास ₹50 लाख हैं, जिन पर 7% सालाना रिटर्न मिलता है, और आपको 20 साल तक आय चाहिए। हर महीने ₹38,122.24 निकाल सकते हैं, यानी साल में ₹4,57,466.85।

20 साल में कुल ₹91.49 लाख (₹91,49,337.01) मिलते हैं, जिसमें ₹41.49 लाख (₹41,49,337.01) निवेश की बढ़त है — यानी आपकी अपनी रकम से कहीं ज़्यादा।

ध्यान दें: यह रकम पूरे 20 साल एक जैसी रहती है। 15-20 साल में महंगाई इसकी खरीद-शक्ति काफ़ी घटा देगी — असर महंगाई कैलकुलेटर से देखें।

भारत में एन्युटी और पेंशन के विकल्प

बीमा कंपनियों की एन्युटी (जैसे NPS से रिटायरमेंट पर खरीदी जाने वाली एन्युटी) आमतौर पर जीवन भर पेंशन देती है, और कई प्लान में मूल रकम नॉमिनी को लौटती है। उनकी दरें इस कैलकुलेटर से अलग होंगी, क्योंकि उनमें जीवन-अवधि का जोखिम और बीमा कंपनी का खर्च शामिल होता है।

दूसरा रास्ता है खुद निकासी: म्यूचुअल फंड में SWP या FD और सरकारी योजनाओं का मिश्रण। यह कैलकुलेटर इसी तरह की तय अवधि वाली निकासी का हिसाब देता है। अगर आप पहले से तय रकम निकालना चाहते हैं और जानना है कि फंड कितने साल चलेगा, तो पैसा कितने साल चलेगा कैलकुलेटर देखें।

समझदारी से प्लान करें

  • रिटर्न सावधानी से मानें; ज़्यादा रिटर्न मानने से मासिक आय बढ़ी हुई दिखेगी।
  • अवधि लंबी रखें — लोगों की उम्र अनुमान से ज़्यादा भी हो सकती है।
  • पहले कुछ सालों के खर्च सुरक्षित विकल्पों में रखें, ताकि बाज़ार गिरने पर निवेश बेचने न पड़ें।
  • निकासी और पेंशन पर टैक्स लगता है; टैक्स के बाद की आय का अनुमान CA से लें।
  • कॉर्पस बनाने का लक्ष्य रिटायरमेंट कैलकुलेटर से तय करें।

मान्यताएं और सीमाएं

कैलकुलेटर हर साल एक जैसा रिटर्न, हर महीने के अंत में बराबर भुगतान और अवधि के अंत में शून्य बैलेंस मानता है। असल रिटर्न ऊपर-नीचे होते हैं, और शुरुआती सालों में गिरावट फंड को जल्दी खत्म कर सकती है।

महंगाई के साथ बढ़ने वाली निकासी, टैक्स, फंड के खर्च (एक्सपेंस रेशियो) और बीमा कंपनी की एन्युटी की शर्तें इसमें शामिल नहीं हैं। NPS या एन्युटी प्लान चुनते समय आधिकारिक दस्तावेज़ और सलाहकार की राय लें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

₹50 लाख से हर महीने कितनी पेंशन मिल सकती है?

7% रिटर्न पर 20 साल के लिए लगभग ₹38,122 महीना, अगर पूरा फंड इस्तेमाल हो जाए। रिटर्न या अवधि बदलने पर यह रकम बदलेगी।

एन्युटी और SWP में क्या फर्क है?

एन्युटी बीमा कंपनी का उत्पाद है जो तय दर पर, अक्सर जीवन भर, पेंशन देता है। SWP में आप अपने म्यूचुअल फंड से खुद तय रकम निकालते हैं; रिटर्न और जोखिम आपका है।

क्या भुगतान महंगाई के साथ बढ़ता है?

इस कैलकुलेटर में नहीं, भुगतान पूरे समय बराबर है। महंगाई के हिसाब से बढ़ती निकासी चाहिए तो शुरुआती रकम कम रखनी होगी।

क्या अवधि के अंत में कुछ बचेगा?

नहीं, हिसाब ऐसा है कि आखिरी भुगतान के बाद बैलेंस शून्य हो। विरासत छोड़नी हो तो उतनी रकम अलग रखें और बाकी पर हिसाब करें।

स्रोत और आगे पढ़ें

अंतिम समीक्षा 13 अक्टूबर 2026 · हम कैसे गणना करते हैं