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स्टॉक एवरेज कैलकुलेटर

एक ही शेयर कई बार अलग भाव पर खरीदा है? यहां अपना असली औसत भाव (एवरेज प्राइस) निकालें और देखें कि आज के भाव पर आप फायदे में हैं या नुकसान में।

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प्रति यूनिट औसत लागत₹452.00
प्रति यूनिट औसत लागत₹452.00
कुल मात्रा
250
कुल लागत
₹1,13,000
मौजूदा वैल्यू
₹1,15,000
लाभ या हानि
₹2,000.00
रिटर्न
1.77%

इस कैलकुलेटर का इस्तेमाल कैसे करें

  1. हर खरीद के लिए खरीद 1 की कीमत और खरीद 1 की मात्रा भरें, फिर दूसरी खरीद के लिए खरीद 2 की कीमत और खरीद 2 की मात्रा।
  2. ज़रूरत हो तो तीसरी और चौथी खरीद भी जोड़ें; खाली या 0 वाली पंक्तियां गिनी नहीं जातीं।
  3. शेयर का आज का भाव मौजूदा कीमत में डालें।
  4. प्रति यूनिट औसत लागत पढ़ें, फिर लाभ या हानि और रिटर्न देखें।

औसत भाव कैसे निकलता है

औसत खरीद भाव एक भारित (वेटेड) औसत है: हर खरीद उतना ही वज़न रखती है जितने शेयर आपने उसमें लिए। ₹500 पर 100 शेयर और ₹420 पर 150 शेयर का औसत ₹460 नहीं होता, क्योंकि कम भाव पर आपने ज़्यादा शेयर खरीदे।

औसत भाव = (P₁Q₁ + P₂Q₂ + …) / (Q₁ + Q₂ + …)
  • Pᵢ = खरीद i में प्रति शेयर चुकाया भाव
  • Qᵢ = खरीद i में लिए गए शेयर या यूनिट
  • लाभ या हानि = मौजूदा भाव × कुल मात्रा − कुल लागत

तरीका सीधा है: कुल चुकाई गई रकम जोड़ें और कुल शेयरों की संख्या से भाग दें। जिस पंक्ति में कीमत या मात्रा शून्य है, उसे छोड़ दिया जाता है।

उदाहरण: दो बार में खरीदे शेयर

आपने ₹500 पर 100 शेयर और ₹420 पर 150 शेयर खरीदे। 250 शेयरों की कुल लागत ₹1,13,000 है, इसलिए औसत भाव ₹452 है, ₹460 वाला सीधा मध्य बिंदु नहीं।

₹460 के मौजूदा भाव पर आपकी होल्डिंग ₹1,15,000 की है, यानी ₹2,000 का फायदा, 1.77%। अगर आप ₹380 पर 100 शेयर और खरीदते हैं, तो औसत घटकर ₹431.43 हो जाता है, कुल लागत ₹1,51,000 होती है और ₹460 पर फायदा ₹10,000 यानी 6.62% हो जाता है।

एवरेजिंग डाउन और SIP

भाव गिरने पर और खरीदने से औसत भाव घटता है और ब्रेक-ईवन भाव भी नीचे आता है। इससे निवेश बेहतर नहीं हो जाता, सिर्फ आपकी शुरुआती रेखा बदलती है। गिरते शेयर में और पैसा डालने से एक ही कंपनी में जोखिम भी बढ़ता है, इसलिए पहले खुद से पूछें: क्या आज के भाव पर मैं यह शेयर नए सिरे से खरीदता?

हर महीने तय रकम लगाने वाला SIP अपने आप सस्ते भाव पर ज़्यादा यूनिट खरीदता है, इसे रुपी कॉस्ट एवरेजिंग कहते हैं। पूरी पोज़िशन का हिसाब देखने के लिए स्टॉक प्रॉफिट कैलकुलेटर और ROI कैलकुलेटर देखें।

नतीजे का इस्तेमाल कैसे करें

ब्रोकरेज और टैक्स से पहले आपका औसत भाव ही आपका ब्रेक-ईवन है। मौजूदा भाव उससे नीचे है तो बेचने पर नुकसान बुक होगा, ऊपर है तो फायदा। रिटर्न को दूसरे विकल्पों से मिलाएं और टैक्स का ध्यान रखें।

हर खरीद की तारीख, भाव, मात्रा और चार्ज एक जगह लिखने की आदत डालें। नई खरीद के बाद कैलकुलेटर दोबारा चलाएं और और खरीदने, होल्ड करने या बेचने से पहले औसत भाव को मौजूदा भाव से मिलाएं। अगर आप पोज़िशन का सिर्फ कुछ हिस्सा बेचते हैं, तो टैक्स के लिए बेचे गए शेयरों की लागत अक्सर FIFO (पहले खरीदे, पहले बेचे) से गिनी जाती है, न कि साधारण औसत से; अपने ब्रोकर का कैपिटल गेन स्टेटमेंट देखें।

आम गलतियां

  • मात्रा का वज़न दिए बिना सिर्फ भावों का औसत निकाल लेना।
  • ब्रोकरेज, STT, GST और दूसरे चार्ज भूल जाना, जो प्रति शेयर असली लागत बढ़ाते हैं।
  • डिविडेंड रीइन्वेस्टमेंट या बोनस शेयर को नज़रअंदाज़ करना, जो अलग भाव पर अतिरिक्त खरीद जैसे हैं।
  • यह मान लेना कि टैक्स विभाग भी वही औसत तरीका अपनाता है जो आपका ब्रोकर ऐप दिखाता है।

मान्यताएं और सीमाएं

कैलकुलेटर चार खरीद तक संभालता है और ब्रोकरेज, डिविडेंड, स्टॉक स्प्लिट, बोनस या करेंसी कन्वर्ज़न शामिल नहीं करता। यह आपके डाले भाव पर बिना बेचे (अनरियलाइज़्ड) नतीजा दिखाता है। इनकम टैक्स रिटर्न के लिए अपने ब्रोकर का स्टेटमेंट इस्तेमाल करें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

अलग-अलग समय पर खरीदे शेयरों का औसत भाव कैसे निकालें?

हर भाव को उसकी मात्रा से गुणा करें, सब जोड़ें और कुल शेयरों की संख्या से भाग दें।

क्या एवरेजिंग डाउन से जोखिम घटता है?

नहीं। औसत भाव घटता है, लेकिन एक ही शेयर में आपकी लगाई रकम बढ़ जाती है।

क्या ब्रोकरेज को भाव में जोड़ना चाहिए?

हां, असली लागत के लिए जोड़ें। हर खरीद के कुल चार्ज को मात्रा से भाग देकर उस खरीद के भाव में जोड़ दें।

क्या यह म्यूचुअल फंड या क्रिप्टो के लिए भी चलेगा?

हां। कई बार में अलग भाव (NAV) पर खरीदी किसी भी चीज़ का भारित औसत भाव होता है, और मात्रा दशमलव में भी डाल सकते हैं।

स्रोत और आगे पढ़ें

अंतिम समीक्षा 13 अक्टूबर 2026 · हम कैसे गणना करते हैं