इस कैलकुलेटर का इस्तेमाल कैसे करें
- मौजूदा उम्र और रिटायरमेंट की उम्र डालें।
- मौजूदा रिटायरमेंट बचत (जैसे EPF, PPF, NPS और म्यूचुअल फंड का जोड़) और हर महीने का मासिक निवेश भरें।
- अनुमानित सालाना रिटर्न, महंगाई और निकासी दर डालें; चाहें तो योगदान में सालाना बढ़ोतरी भी।
- रिटायरमेंट पर बचत, इससे मिलने वाली मासिक आय और आज के पैसे में मासिक आय पढ़ें।
अनुमान कैसे बनता है
कैलकुलेटर आपकी मौजूदा बचत और हर महीने के निवेश को अनुमानित रिटर्न से रिटायरमेंट की उम्र तक बढ़ाता है। फिर उस फंड पर निकासी दर लगाकर बताता है कि हर महीने कितनी आय निकाली जा सकती है।
बैलेंस(t+1) = बैलेंस(t) × (1 + r_m) + C; आय = बैलेंस × W / 12; आज के पैसे में = बैलेंस / (1 + i)^साल- r_m = (1 + सालाना रिटर्न)^(1/12) − 1, मासिक रिटर्न
- C = मासिक निवेश
- W = निकासी दर (उदाहरण के लिए 4%)
- i = सालाना महंगाई दर; साल = रिटायरमेंट की उम्र − मौजूदा उम्र
आखिर में सब कुछ महंगाई से डिस्काउंट करके आज के पैसे में दिखाया जाता है, क्योंकि 30 साल बाद का ₹1 लाख आज के ₹1 लाख जितना नहीं खरीद पाएगा।
उदाहरण: 30 की उम्र, 60 पर रिटायरमेंट
मान लीजिए आज ₹5 लाख की रिटायरमेंट बचत है और आप हर महीने ₹10,000 निवेश करते हैं। 10% सालाना रिटर्न पर 60 की उम्र तक फंड लगभग ₹2.94 करोड़ हो जाएगा। इसमें आपका अपना योगदान ₹41 लाख है; बाकी लगभग ₹2.53 करोड़ निवेश की बढ़त है।
4% निकासी दर पर यह फंड हर महीने लगभग ₹97,844 दे सकता है। लेकिन 6% महंगाई के बाद आज के पैसे में यह सिर्फ ₹17,036 महीना है, और पूरे फंड की आज की कीमत लगभग ₹51.11 लाख। बड़ा दिखने वाला आंकड़ा असल में उतना बड़ा नहीं है।
नतीजे को सबसे ज़्यादा क्या बदलता है
मासिक निवेश ₹15,000 करें तो आज के पैसे में मासिक आय ₹23,022 हो जाती है। हर साल निवेश 10% बढ़ाएं (स्टेप-अप) तो यह ₹39,700 तक पहुंचती है, यानी दोगुने से ज़्यादा। रिटर्न 12% मिले तो ₹26,407।
दूसरी ओर, 55 की उम्र में रिटायर होने पर आज के पैसे में आय घटकर ₹13,786 रह जाती है, क्योंकि निवेश के पांच साल कम हुए और निकासी जल्दी शुरू हुई। सबसे ताकतवर कदम आमतौर पर जल्दी शुरू करना और हर साल निवेश बढ़ाना है।
नतीजे से फैसला कैसे लें
- 'आज के पैसे में मासिक आय' की तुलना अपने आज के मासिक खर्च से करें। अगर कमी है, तो निवेश बढ़ाएं, स्टेप-अप जोड़ें या रिटायरमेंट की उम्र पर दोबारा सोचें।
- EPF, PPF, NPS जैसी योजनाओं और म्यूचुअल फंड की बचत को मौजूदा बचत में जोड़ें। इन योजनाओं के नियम और दरें उनकी आधिकारिक वेबसाइट (जैसे NPS के लिए PFRDA) से जानें।
- रिटायरमेंट से पहले के सालों में अपने अनुमान हर साल अपडेट करें।
- जल्दी आर्थिक आज़ादी का लक्ष्य हो तो FIRE कैलकुलेटर देखें, और महंगाई का असर महंगाई कैलकुलेटर में।
- रिटायरमेंट निवेश शुरू करने से पहले इमरजेंसी फंड तैयार रखें, ताकि ज़रूरत पड़ने पर लंबी अवधि का पैसा न निकालना पड़े।
अनुमान की सीमाएं
कैलकुलेटर हर साल एक जैसा रिटर्न और एक जैसी महंगाई मानता है। असल में बाज़ार ऊपर-नीचे होता है, और रिटायरमेंट के पास आई गिरावट का असर बड़ा होता है। 4% निकासी दर अमेरिकी शोध से आया एक आम पैमाना है; भारत में महंगाई अलग होने के कारण कम निकासी दर ज़्यादा सावधान अनुमान देगी।
टैक्स, पेंशन, ग्रेच्युटी, इलाज के बड़े खर्च और रिटायरमेंट के बाद की लंबी उम्र यहां शामिल नहीं हैं। बड़े फैसलों के लिए SEBI-पंजीकृत निवेश सलाहकार से बात करें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
रिटायरमेंट के लिए कितना फंड चाहिए?
एक मोटा तरीका: रिटायरमेंट के सालाना खर्च को निकासी दर से भाग दें। 4% पर यह सालाना खर्च का 25 गुना होता है, और कम निकासी दर पर उससे ज़्यादा।
रिटर्न कितना मानें?
अपने निवेश के मिश्रण के हिसाब से एक सावधान अनुमान लें, और कम-ज़्यादा दरों पर भी हिसाब लगाकर देखें। पिछला रिटर्न भविष्य की गारंटी नहीं है।
क्या EPF और PPF को मौजूदा बचत में जोड़ें?
हां, अगर वह पैसा रिटायरमेंट के लिए ही है। हर महीने का EPF योगदान भी मासिक निवेश में जोड़ सकते हैं।
निकासी दर का मतलब क्या है?
हर साल फंड का कितना प्रतिशत खर्च के लिए निकाला जाएगा। कम दर पर पैसा ज़्यादा समय तक चलने की संभावना होती है।
आज के पैसे में आय इतनी कम क्यों दिखती है?
क्योंकि 30 साल की महंगाई कीमतों को कई गुना बढ़ा देती है। यही आंकड़ा बताता है कि वह आय आज की तुलना में असल में कितनी खरीदारी कर पाएगी।