इस कैलकुलेटर का इस्तेमाल कैसे करें
- बॉन्ड की फेस वैल्यू और आपकी चुकाई गई कीमत भरें।
- कूपन दर (फेस वैल्यू पर सालाना ब्याज का प्रतिशत) और मैच्योरिटी तक साल डालें।
- सालाना कूपन भुगतान चुनें: सालाना, छमाही, तिमाही या मासिक।
- यील्ड टू मैच्योरिटी (YTM) को करंट यील्ड से मिलाएं, और मैच्योरिटी पर लाभ या हानि देखें।
कूपन, करंट यील्ड और यील्ड टू मैच्योरिटी
बॉन्ड फेस वैल्यू के प्रतिशत के रूप में तय कूपन (ब्याज) देता है और मैच्योरिटी पर फेस वैल्यू लौटाता है। अगर आप फेस वैल्यू से कम या ज़्यादा कीमत चुकाते हैं, तो आपका असली रिटर्न कूपन दर से अलग होगा। सरकारी बॉन्ड (G-Sec), कॉरपोरेट बॉन्ड और NCD, सब पर यही गणित लागू होता है।
कीमत = Σ C/(1 + y)ᵗ + F/(1 + y)ⁿ करंट यील्ड = सालाना कूपन / कीमत- C = प्रति अवधि कूपन (फेस वैल्यू × कूपन दर ÷ सालाना भुगतानों की संख्या)
- F = मैच्योरिटी पर लौटने वाली फेस वैल्यू
- n = मैच्योरिटी तक कूपन भुगतानों की संख्या
- y = प्रति अवधि यील्ड; बताई जाने वाली YTM = y × सालाना भुगतानों की संख्या
करंट यील्ड एक साल के कूपन को चुकाई गई कीमत से भाग देती है। यह आसान है, पर मैच्योरिटी पर होने वाला फायदा या नुकसान नहीं गिनती। यील्ड टू मैच्योरिटी (YTM) दोनों गिनती है: यह वह सालाना दर है जिस पर हर कूपन और आखिरी भुगतान की प्रेज़ेंट वैल्यू आपकी कीमत के बराबर हो जाती है।
उदाहरण: डिस्काउंट पर खरीदा ₹1,000 का बॉन्ड
₹1,000 फेस वैल्यू, 8% कूपन, 5 साल की मैच्योरिटी और छमाही ब्याज वाला बॉन्ड ₹950 में मिल रहा है। कूपन ₹80 सालाना है, कुल ₹400। करंट यील्ड 8.42% है, लेकिन यील्ड टू मैच्योरिटी 9.27%, क्योंकि मैच्योरिटी पर फेस वैल्यू मिलने से आपको ₹50 और मिलते हैं।
यही बॉन्ड ₹1,050 में खरीदें तो YTM घटकर 6.8% रह जाती है और मैच्योरिटी पर ₹50 का नुकसान होता है। ठीक ₹1,000 पर YTM कूपन के बराबर, 8% है। छमाही की जगह सालाना कूपन हो तो ₹950 पर YTM 9.3% आती है; यह छोटा फर्क भुगतान की आवृत्ति से आता है।
कीमत और यील्ड उल्टी दिशा में चलती हैं
बाज़ार की ब्याज दरें बढ़ती हैं तो कम कूपन वाले पुराने बॉन्ड की कीमत तब तक गिरती है जब तक उनकी यील्ड नए बॉन्ड जितनी न हो जाए। दरें घटें तो कीमतें बढ़ती हैं। लंबी मैच्योरिटी वाले बॉन्ड पर यह असर ज़्यादा होता है, इसीलिए डेट म्यूचुअल फंड की NAV भी दरों के साथ ऊपर-नीचे होती है।
अगर आप बॉन्ड मैच्योरिटी तक रखते हैं और जारीकर्ता भुगतान करता है, तो बीच के उतार-चढ़ाव से खरीद के समय तय हुई YTM नहीं बदलती।
नतीजे का इस्तेमाल कैसे करें
बॉन्ड की तुलना YTM से करें, कूपन से नहीं। जारीकर्ता की क्रेडिट रेटिंग देखें: ज़्यादा यील्ड का मतलब अक्सर डिफॉल्ट का ज़्यादा जोखिम होता है, और कुछ बॉन्ड (कॉल ऑप्शन वाले) समय से पहले चुकाए जा सकते हैं।
बॉन्ड को बैंक FD से मिलाने के लिए FD कैलकुलेटर या APY कैलकुलेटर इस्तेमाल करें। महंगाई के बाद यील्ड कितनी बचती है, यह रियल रिटर्न कैलकुलेटर बताता है।
आम गलतियां
- यील्ड की जगह कूपन दरों की तुलना करना।
- एक्रूड इंटरेस्ट भूलना, जो कूपन तारीखों के बीच खरीदने पर विक्रेता को चुकाना पड़ता है।
- टैक्स को नज़रअंदाज़ करना; कूपन ब्याज और कैपिटल गेन पर टैक्स अलग-अलग तरह लग सकता है, अपने CA से जांचें।
- यह मान लेना कि डेट फंड की भी एक बॉन्ड जैसी तय मैच्योरिटी वैल्यू होती है।
मान्यताएं और सीमाएं
टूल मानता है कि जारीकर्ता हर कूपन समय पर देगा और फेस वैल्यू लौटाएगा, आप मैच्योरिटी तक रखेंगे, और कूपन उसी YTM पर दोबारा निवेश होंगे। यह पूरी कूपन अवधियां गिनता है और एक्रूड इंटरेस्ट, कॉल फीचर, ब्रोकरेज और टैक्स शामिल नहीं करता। खरीदने से पहले बताई गई यील्ड अपने ब्रोकर या प्लेटफॉर्म से मिला लें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
यील्ड टू मैच्योरिटी क्या है?
आज की कीमत पर बॉन्ड खरीदकर, सारे कूपन लेकर और फेस वैल्यू पर चुकाए जाने तक रखने पर मिलने वाला कुल सालाना रिटर्न।
मेरी यील्ड कूपन दर से ज़्यादा क्यों है?
आपने फेस वैल्यू से कम कीमत दी, इसलिए कूपन के अलावा मैच्योरिटी पर फर्क की रकम भी मिलती है। फेस वैल्यू से ज़्यादा चुकाने पर उल्टा होता है।
करंट यील्ड और YTM में क्या फर्क है?
करंट यील्ड सालाना कूपन को कीमत से भाग देती है। YTM मैच्योरिटी पर लाभ या हानि और सभी भुगतानों का समय भी गिनती है।
क्या कूपन की आवृत्ति से फर्क पड़ता है?
थोड़ा सा। बार-बार मिलने वाला कूपन जल्दी हाथ आता है और दोबारा लगाया जा सकता है, जिससे प्रभावी सालाना यील्ड थोड़ी बढ़ती है।
आम निवेशक सरकारी बॉन्ड कैसे खरीद सकता है?
RBI का RBI Retail Direct प्लेटफॉर्म आम लोगों को G-Sec और ट्रेज़री बिल खरीदने की सुविधा देता है; ब्रोकर के ज़रिए भी लिस्टेड बॉन्ड मिलते हैं।