इस कैलकुलेटर का इस्तेमाल कैसे करें
- आज की राशि डालें, जैसे मासिक घर खर्च या किसी लक्ष्य की आज की कीमत।
- अनुमानित सालाना महंगाई दर भरें।
- कितने साल आगे देखना है, वह वर्ष में डालें।
- उन्हीं चीज़ों की भविष्य में कीमत और आज की राशि की क्रय शक्ति पढ़ें।
महंगाई चक्रवृद्धि की तरह बढ़ती है
महंगाई हर साल पिछले साल की बढ़ी हुई कीमत पर लगती है, इसलिए यह चक्रवृद्धि ब्याज की तरह काम करती है। 6% सालाना महंगाई का मतलब 10 साल में 60% नहीं, उससे ज़्यादा बढ़ोतरी है।
भविष्य की कीमत = A × (1 + i)^n; क्रय शक्ति = A / (1 + i)^n- A = आज की राशि
- i = सालाना महंगाई दर, दशमलव में (6% = 0.06)
- n = सालों की संख्या
क्रय शक्ति इसका उल्टा है: भविष्य में आज की रकम से कितनी चीज़ें खरीदी जा सकेंगी, उसे आज के पैसे में व्यक्त किया जाता है।
उदाहरण: ₹1 लाख, 6% महंगाई, 10 साल
6% सालाना महंगाई मानें तो आज ₹1,00,000 में आने वाली चीज़ें 10 साल बाद लगभग ₹1,79,085 की होंगी। कीमतों में कुल बढ़ोतरी 79.08% है, यानी 60% से काफी ज़्यादा।
दूसरी तरफ, अगर ₹1,00,000 बिना किसी ब्याज के रखे रहे, तो 10 साल बाद उनकी क्रय शक्ति सिर्फ लगभग ₹55,839 के बराबर होगी: 44.16% की कमी। 4% महंगाई पर यही आंकड़ा ₹67,556 होता।
उदाहरण: मासिक घर खर्च 20 साल बाद
आज घर का खर्च ₹50,000 महीना है। 6% महंगाई पर 20 साल बाद वही जीवनशैली ₹1,60,357 महीना मांगेगी, यानी तीन गुना से ज़्यादा। और आज के ₹50,000 की क्रय शक्ति तब लगभग ₹15,590 रह जाएगी।
रिटायरमेंट की योजना में यही सबसे बड़ी चूक होती है: आज के खर्च से लक्ष्य तय करना। रिटायरमेंट कैलकुलेटर महंगाई को अपने हिसाब में जोड़ता है।
नतीजे से योजना कैसे बनाएं
- हर लंबे लक्ष्य, जैसे बच्चे की पढ़ाई या घर, की आज की कीमत को पहले भविष्य की कीमत में बदलें, फिर बचत लक्ष्य कैलकुलेटर में डालें।
- अपनी बचत के रिटर्न की तुलना महंगाई से करें: अगर FD टैक्स के बाद महंगाई से कम दे रही है, तो असल में आपकी क्रय शक्ति घट रही है।
- पैसा कितने साल में आधा हो जाएगा, इसका अंदाज़ा 72 का नियम कैलकुलेटर से लगाएं: 6% पर लगभग 12 साल।
- भविष्य की किसी रकम का आज का मूल्य वर्तमान मूल्य कैलकुलेटर से निकालें।
क्रय शक्ति को बचाने के तरीके
लंबे समय के लिए रखा पैसा ऐसी जगह होना चाहिए जिसका रिटर्न टैक्स के बाद महंगाई से ज़्यादा रहने की संभावना हो। इसके लिए जोखिम और अवधि दोनों समझें; छोटी अवधि के पैसे को सुरक्षित रखना ज़्यादा ज़रूरी है।
अपनी आय को भी महंगाई के साथ बढ़ाने की कोशिश करें, और बड़े खर्चों की योजना भविष्य की कीमत पर बनाएं, आज की कीमत पर नहीं।
बड़े खर्चों के लिए अलग-अलग दर से हिसाब लगाएं। उदाहरण के लिए, अगर आपको लगता है कि पढ़ाई का खर्च सामान्य महंगाई से तेज़ बढ़ेगा, तो उस लक्ष्य के लिए ऊंची दर डालकर देखें।
अनुमान और सीमाएं
कैलकुलेटर हर साल एक स्थिर महंगाई दर मानता है। असल में महंगाई साल-दर-साल बदलती है, और आपकी अपनी महंगाई अलग हो सकती है: शिक्षा, इलाज या किराए की कीमतें कई बार सामान्य महंगाई से अलग गति से बढ़ती हैं। भारत में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) जारी करता है।
यहां दिखाई गई 6% दर सिर्फ उदाहरण है; अपने अनुमान के लिए आधिकारिक आंकड़े और अपने खर्च का अनुभव दोनों देखें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
महंगाई दर कैसे निकाली जाती है?
आमतौर पर उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) से, जो सामान और सेवाओं की एक टोकरी की कीमत में सालाना बदलाव मापता है। भारत में यह MoSPI जारी करता है।
10 साल बाद ₹1 लाख की कीमत कितनी होगी?
6% सालाना महंगाई पर उसकी क्रय शक्ति आज के लगभग ₹55,839 के बराबर होगी। दूसरी दर डालकर अपना अनुमान देखें।
क्या पिछले सालों की महंगाई भी निकाल सकते हैं?
यह कैलकुलेटर आगे का अनुमान लगाता है। पिछले साल की कीमत आज के हिसाब से देखने के लिए उन सालों की औसत महंगाई दर डालें; सटीक आंकड़ों के लिए आधिकारिक CPI सीरीज़ देखें।
महंगाई से निवेश पर क्या असर पड़ता है?
असली रिटर्न लगभग नॉमिनल रिटर्न में से महंगाई घटाने के बराबर है। 7% रिटर्न और 6% महंगाई का मतलब क्रय शक्ति में सिर्फ थोड़ी बढ़त।