इस कैलकुलेटर का इस्तेमाल कैसे करें
- मासिक ग्रॉस आय और मौजूदा लोन की अन्य मासिक EMI डालें।
- डाउन पेमेंट के लिए कैश, ऑफर की ब्याज दर और लोन अवधि भरें।
- अधिकतम डेट-टू-इनकम अनुपात में वह प्रतिशत डालें जितना आप (या बैंक) आय का हिस्सा सारी EMI पर मानते हैं, और मासिक टैक्स, बीमा और शुल्क में मेंटेनेंस जैसे खर्च।
- आप इतनी कीमत का घर ले सकते हैं, अधिकतम लोन और मासिक आवास भुगतान पढ़ें।
किफायती कीमत कैसे निकलती है
भारत में बैंक लोन एलिजिबिलिटी अक्सर FOIR (Fixed Obligations to Income Ratio) से तय करते हैं: आपकी आय का कितना हिस्सा सभी EMI मिलाकर जा सकता है। यह कैलकुलेटर उसी तरह का हिसाब करता है। आय × अनुपात में से मौजूदा EMI घटाने पर घर के लिए मासिक बजट बचता है; उसमें से टैक्स, बीमा और मेंटेनेंस निकालकर जो बचे, वही नई EMI की सीमा है।
आवास बजट = आय × अनुपात − मौजूदा EMI; EMI = बजट − टैक्स/बीमा/शुल्क; लोन = EMI · (1 − (1 + r)^−n) / r; कीमत = लोन + डाउन पेमेंट- अनुपात = आय का अधिकतम हिस्सा जो सभी EMI में जा सकता है (FOIR जैसा)
- r = मासिक ब्याज दर (सालाना दर ÷ 12 ÷ 100)
- n = किस्तों की संख्या (साल × 12)
- EMI = नए होम लोन की मूलधन और ब्याज वाली मासिक किस्त
उस EMI से एन्युटी फॉर्मूला उल्टा चलाकर अधिकतम लोन निकलता है, और उसमें डाउन पेमेंट जोड़कर घर की कीमत।
उदाहरण: ₹1.5 लाख मासिक आय और ₹15 लाख कैश
मान लीजिए आय ₹1,50,000 महीना, मौजूदा कार लोन की EMI ₹10,000, डाउन पेमेंट के लिए ₹15 लाख, ब्याज दर 8.5%, अवधि 20 साल, मेंटेनेंस आदि ₹3,000 महीना और उदाहरण के तौर पर अनुपात 40%। सारी EMI और खर्च मिलाकर आवास पर ₹50,000 महीना जा सकता है, जिसमें ₹47,000 नई EMI है।
इतनी EMI से अधिकतम लोन लगभग ₹54.16 लाख बनता है, और ₹15 लाख डाउन पेमेंट जोड़कर आप करीब ₹69.16 लाख का घर देख सकते हैं। डाउन पेमेंट कीमत का लगभग 21.69% होगा।
जवाब को सबसे ज़्यादा क्या बदलता है
ब्याज दर 9.5% हो तो उसी आय पर घर की कीमत घटकर लगभग ₹65.42 लाख रह जाती है। मौजूदा ₹10,000 की EMI खत्म हो जाए तो कीमत बढ़कर करीब ₹80.68 लाख हो जाती है। और अगर बैंक 50% तक का अनुपात स्वीकार करे तो कीमत ₹86.44 लाख तक जा सकती है, लेकिन तब EMI ₹62,000 होगी।
ऊंचा अनुपात मतलब ज़्यादा लोन, पर कम गुंजाइश। बैंक की मंज़ूरी और आपका आराम दो अलग बातें हैं।
कीमत से असली बजट तक
यह आंकड़ा ऊपरी सीमा है, लक्ष्य नहीं। स्टांप ड्यूटी, रजिस्ट्रेशन, ब्रोकरेज, इंटीरियर और शिफ्टिंग के लिए अलग से कैश चाहिए, और डाउन पेमेंट देने के बाद भी कुछ महीनों का इमरजेंसी फंड बचना चाहिए। किसी खास घर की पूरी EMI और खर्च होम लोन EMI कैलकुलेटर में देखें।
अपना मौजूदा अनुपात FOIR / डेट-टू-इनकम कैलकुलेटर से निकालें, और बजट कैलकुलेटर से देखें कि EMI के बाद बाकी खर्च कैसे चलेंगे।
सुरक्षित रूप से ज़्यादा लोन पाने के तरीके
- पहले छोटे लोन और क्रेडिट कार्ड का बकाया चुकाएं; हर खत्म हुई EMI एलिजिबिलिटी बढ़ाती है।
- जीवनसाथी या परिवार के कमाने वाले सदस्य को को-एप्लिकेंट बनाएं, अगर दोनों मिलकर EMI भरने को तैयार हों।
- क्रेडिट स्कोर सुधारें, ताकि बेहतर दर मिले।
- अवधि बढ़ाने से एलिजिबिलिटी बढ़ती है, लेकिन कुल ब्याज भी; इसे आखिरी विकल्प रखें।
- डाउन पेमेंट के लिए और बचत करें; इससे लोन और जोखिम दोनों घटते हैं।
अनुमान और सीमाएं
बैंक FOIR अलग-अलग तरह से गिनते हैं: कई नेट (इन-हैंड) आय पर, कुछ ग्रॉस पर, और सीमा आय, उम्र, नौकरी के प्रकार और बैंक की नीति से बदलती है। यहां डाला गया अनुपात सिर्फ उदाहरण है। बैंक लोन-टू-वैल्यू सीमा, आपकी उम्र के हिसाब से अधिकतम अवधि और क्रेडिट स्कोर भी देखते हैं, जो यह कैलकुलेटर नहीं देखता।
अधिकतम हाउसिंग अनुपात (फ्रंट-एंड) अमेरिकी तरीका है; भारत के लिए इसे 0 रखें। सटीक एलिजिबिलिटी के लिए बैंक से बात करें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
₹1 लाख सैलरी पर कितना होम लोन मिल सकता है?
यह बैंक के FOIR, ब्याज दर, अवधि और आपकी मौजूदा EMI पर निर्भर है। अपनी आय और बैंक का अनुपात डालकर अनुमान देखें, फिर बैंक से पुष्टि करें।
FOIR क्या है?
Fixed Obligations to Income Ratio: आय का वह हिस्सा जो सभी EMI और तय कर्ज़ भुगतानों में जाता है। यह डेट-टू-इनकम अनुपात जैसा ही है।
ग्रॉस आय डालूं या इन-हैंड?
बैंक अक्सर नेट आय देखते हैं। सावधानी से हिसाब लगाना हो तो इन-हैंड आय डालें; इससे अनुमान कम पर ज़्यादा सुरक्षित आएगा।
को-एप्लिकेंट जोड़ने से क्या फायदा है?
दोनों की आय गिनी जाती है, इसलिए एलिजिबिलिटी बढ़ सकती है। लेकिन दोनों लोन के लिए बराबर ज़िम्मेदार होते हैं।
मासिक टैक्स, बीमा और शुल्क में क्या डालें?
सोसाइटी मेंटेनेंस, प्रॉपर्टी टैक्स का मासिक हिस्सा और होम इंश्योरेंस। ये EMI नहीं हैं, पर घर के हर महीने के खर्च हैं।