Numfino

50/30/20 बजट कैलकुलेटर

महीने की सैलरी को तीन हिस्सों में बांटने का आसान तरीका: ज़रूरतें, इच्छाएं, और बचत व कर्ज़ चुकाना। अपनी आय डालें और प्रतिशत अपने हिसाब से बदलें।

INR
%
%
%
ज़रूरतें₹30,000
ज़रूरतें₹30,000
इच्छाएं₹18,000
बचत और कर्ज़ चुकाना₹12,000
सालाना बचत
₹1,44,000
साप्ताहिक खर्च (इच्छाएं)
₹4,153.85
  • ज़रूरतें₹30,00050%
  • इच्छाएं₹18,00030%
  • बचत और कर्ज़ चुकाना₹12,00020%

इस कैलकुलेटर का इस्तेमाल कैसे करें

  1. PF और टैक्स कटने के बाद खाते में आने वाली मासिक इन-हैंड सैलरी डालें।
  2. ज़रूरतें, इच्छाएं और बचत और कर्ज़ चुकाना के प्रतिशत देखें; शुरुआत 50, 30 और 20 से करें।
  3. तीनों का जोड़ 100% रहे, यह ध्यान रखें।
  4. हर हिस्से की रकम, सालाना बचत और साप्ताहिक खर्च (इच्छाएं) पढ़ें।

50/30/20 नियम क्या कहता है

यह नियम इन-हैंड आय को तीन हिस्सों में बांटता है। लगभग 50% ज़रूरतों पर: किराया या होम लोन EMI, राशन, बिजली-पानी, आने-जाने का खर्च, बीमा और बच्चों की फीस। लगभग 30% इच्छाओं पर: बाहर खाना, शॉपिंग, OTT, घूमना। और कम से कम 20% बचत, निवेश और अतिरिक्त कर्ज़ चुकाने पर।

यह कोई कानून नहीं, एक शुरुआती ढांचा है। बड़े शहरों में किराया ज़्यादा हो तो ज़रूरतों का हिस्सा बढ़ सकता है; तब इच्छाओं से कटौती करें, बचत से नहीं।

हर हिस्से का गणित

हर हिस्सा आय × प्रतिशत ÷ 100 है। साप्ताहिक खर्च की सीमा इच्छाओं वाले हिस्से को साल में बदलकर 52 हफ्तों में बांटने से निकलती है, ताकि रोज़मर्रा के खर्च पर नज़र रखना आसान हो।

हिस्सा = आय × प्रतिशत ÷ 100
  • आय = मासिक इन-हैंड सैलरी (टैक्स और PF कटने के बाद)
  • प्रतिशत = ज़रूरतों, इच्छाओं या बचत को दिया गया हिस्सा
  • साप्ताहिक इच्छाएं = आय × इच्छाओं का प्रतिशत × 12 ÷ 100 ÷ 52

उदाहरण: ₹60,000 इन-हैंड सैलरी

50/30/20 से ज़रूरतों के लिए ₹30,000, इच्छाओं के लिए ₹18,000 और बचत व कर्ज़ चुकाने के लिए ₹12,000 महीना। साल भर में बचत ₹1,44,000 होगी, और इच्छाओं पर हर हफ्ते लगभग ₹4,154 खर्च किए जा सकते हैं।

अगर किराया और EMI ही ₹30,000 से ऊपर जा रहे हैं, तो इसका मतलब है कि ज़रूरतें 50% से ज़्यादा हैं। तब इच्छाओं को 20% पर लाकर बचत 20% बनाए रखने की कोशिश करें।

नतीजे का इस्तेमाल कैसे करें

पहले महीने में बिल्कुल सही बंटवारा ज़रूरी नहीं है। लक्ष्य यह है कि हर महीने बचत का हिस्सा थोड़ा बढ़े। सैलरी बढ़ने पर बढ़ी हुई रकम का बड़ा हिस्सा बचत में डालें, ताकि खर्च अपने-आप आय के साथ न बढ़ता जाए।

आम गलतियां

  • ग्रॉस सैलरी या CTC से बजट बनाना; हमेशा खाते में आने वाली रकम लें।
  • सालाना खर्च भूलना: बीमा प्रीमियम, स्कूल की सालाना फीस, त्योहार और शादी-ब्याह। इन्हें 12 से भाग देकर मासिक ज़रूरतों में जोड़ें।
  • हर इच्छा को ज़रूरत बता देना; नया फोन अक्सर इच्छा है।
  • बचत को 'जो बचे' पर छोड़ना; पहले बचत, फिर खर्च।

अनुमान और सीमाएं

यह कैलकुलेटर सिर्फ आपके चुने प्रतिशत से आय को बांटता है; यह असली खर्च, टैक्स या महंगाई नहीं देखता। 50/30/20 अमेरिका में लोकप्रिय हुआ नियम है; भारतीय परिवारों में माता-पिता की मदद या संयुक्त परिवार के खर्च जैसी ज़िम्मेदारियां इसे बदल सकती हैं। प्रतिशत अपनी स्थिति के हिसाब से बदलें।

अगर तीनों का जोड़ 100% नहीं है, तो कैलकुलेटर चेतावनी देगा।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

50/30/20 नियम क्या है?

इन-हैंड आय का 50% ज़रूरतों पर, 30% इच्छाओं पर और 20% बचत व कर्ज़ चुकाने पर खर्च करने का एक आसान बजट नियम।

₹30,000 सैलरी में बजट कैसे बनाएं?

50/30/20 से ₹15,000 ज़रूरतें, ₹9,000 इच्छाएं और ₹6,000 बचत। ज़रूरतें ज़्यादा हों तो इच्छाओं को घटाएं, और कम से कम कुछ बचत ज़रूर रखें।

EMI किस हिस्से में आती है?

न्यूनतम EMI ज़रूरतों में। EMI के ऊपर जो अतिरिक्त भुगतान करके कर्ज़ जल्दी चुकाते हैं, वह बचत और कर्ज़ चुकाने वाले हिस्से में।

क्या SIP और PF बचत में गिनें?

SIP, RD और ऐसी हर नियमित बचत 20% वाले हिस्से में आती है। PF अगर सैलरी से पहले ही कटता है, तो वह इन-हैंड आय से बाहर है, यानी आपकी असली बचत उससे ज़्यादा है।

स्रोत और आगे पढ़ें

अंतिम समीक्षा 13 अक्टूबर 2026 · हम कैसे गणना करते हैं