इस कैलकुलेटर का इस्तेमाल कैसे करें
- शेयरों की संख्या डालें।
- प्रति शेयर खरीद मूल्य और प्रति शेयर बिक्री मूल्य भरें।
- खरीद और बिक्री दोनों के सारे चार्ज जोड़कर कुल फीस में डालें (कॉन्ट्रैक्ट नोट से)।
- चाहें तो मुनाफे पर टैक्स का प्रतिशत डालें, फिर शुद्ध लाभ, रिटर्न और ब्रेक-ईवन बिक्री मूल्य पढ़ें।
शेयर पर लाभ कैसे निकलता है
बिक्री से मिली रकम में से खरीद की लागत और सारे चार्ज घटाने पर सकल लाभ बचता है। भारत में एक सौदे पर ब्रोकरेज के अलावा STT, एक्सचेंज ट्रांज़ैक्शन चार्ज, SEBI फीस, स्टांप ड्यूटी, GST और बेचते समय DP चार्ज जैसे खर्च लग सकते हैं। ये सब आपके कॉन्ट्रैक्ट नोट में लिखे होते हैं; उनका जोड़ 'कुल फीस' में डालें।
सकल लाभ = (शेयर × बिक्री) − (शेयर × खरीद) − फीस; शुद्ध लाभ = सकल लाभ − टैक्स; रिटर्न = शुद्ध लाभ ÷ (शेयर × खरीद + फीस)- शेयर = खरीदे-बेचे गए शेयरों की संख्या
- खरीद, बिक्री = प्रति शेयर भाव
- फीस = खरीद और बिक्री दोनों के कुल चार्ज
- टैक्स = सकल लाभ × आपकी टैक्स दर, सिर्फ लाभ होने पर
अगर आप टैक्स दर डालते हैं, तो वह सिर्फ लाभ होने पर लगाई जाती है। रिटर्न प्रतिशत कुल लगाई गई रकम (खरीद + फीस) पर निकाला जाता है।
उदाहरण: एक लाभ वाला और एक नुकसान वाला सौदा
100 शेयर ₹500 पर खरीदे (कुल ₹50,000) और ₹650 पर बेचे (बिक्री से ₹65,000)। कुल चार्ज ₹200 मानें तो शुद्ध लाभ ₹14,800 है और रिटर्न 29.48%।
अब वही शेयर ₹450 पर बेचे होते: बिक्री से ₹45,000 मिलते और नुकसान ₹5,200 होता, यानी रिटर्न −10.36%। ध्यान दें कि चार्ज नुकसान में भी लगते हैं, इसलिए हानि भाव के अंतर से थोड़ी ज़्यादा है।
ब्रेक-ईवन भाव को कैसे पढ़ें
ब्रेक-ईवन बिक्री मूल्य वह भाव है जिस पर बेचने से न लाभ, न हानि। ऊपर के उदाहरण में यह ₹502 है: खरीद भाव ₹500 और प्रति शेयर ₹2 चार्ज।
छोटे सौदों और बार-बार ट्रेडिंग (इंट्राडे) में चार्ज का हिस्सा बड़ा हो जाता है, जिससे ब्रेक-ईवन भाव खरीद भाव से काफी ऊपर चला जाता है। कम मात्रा में बार-बार खरीद-बिक्री करने से पहले यह आंकड़ा ज़रूर देखें।
उदाहरण के लिए, 10 शेयर ₹500 पर खरीदकर ₹510 पर बेचे और दोनों तरफ के चार्ज मिलाकर ₹60 लगे। भाव 2% बढ़ा, लेकिन शुद्ध लाभ सिर्फ ₹40 और रिटर्न 0.79% है, जबकि ब्रेक-ईवन भाव ₹506 है। छोटी मात्रा में चार्ज मुनाफे का बड़ा हिस्सा खा जाते हैं।
शुद्ध नतीजा बेहतर करने के तरीके
- ब्रोकर का चार्ज स्ट्रक्चर समझें और कॉन्ट्रैक्ट नोट से असली खर्च मिलाएं।
- बहुत बार ट्रेडिंग से बचें; हर सौदे पर चार्ज लगते हैं।
- कैपिटल गेन टैक्स होल्डिंग अवधि (शॉर्ट-टर्म या लॉन्ग-टर्म) पर निर्भर करता है। मौजूदा नियम आयकर विभाग की वेबसाइट या अपने टैक्स सलाहकार से जानें।
- लंबी अवधि के निवेश की तुलना के लिए सालाना रिटर्न देखें: CAGR कैलकुलेटर।
- डिविडेंड भी कुल रिटर्न का हिस्सा है; उसे जोड़कर ROI कैलकुलेटर में देखें।
कैलकुलेटर क्या नहीं देखता
यह एक बार की खरीद और एक बार की बिक्री मानता है। अलग-अलग भाव पर कई बार खरीदा हो तो पहले औसत खरीद भाव निकालें। डिविडेंड, बोनस, स्प्लिट, और नुकसान को लाभ से सेट-ऑफ करने के टैक्स नियम शामिल नहीं हैं। टैक्स दर आपको खुद डालनी होगी; यहां कोई दर अपने-आप नहीं ली जाती।
शेयर बाज़ार में निवेश जोखिम भरा है। निवेश से पहले SEBI की निवेशक जागरूकता सामग्री पढ़ें और ज़रूरत हो तो पंजीकृत सलाहकार से बात करें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
शेयर में प्रॉफिट प्रतिशत कैसे निकालें?
शुद्ध लाभ को कुल लागत (खरीद + चार्ज) से भाग देकर 100 से गुणा करें। ऊपर के उदाहरण में ₹14,800 ÷ ₹50,200 = 29.48%।
कुल फीस में क्या-क्या जोड़ें?
ब्रोकरेज, STT, एक्सचेंज चार्ज, SEBI फीस, स्टांप ड्यूटी, GST और DP चार्ज, खरीद और बिक्री दोनों तरफ के। सबसे आसान है कॉन्ट्रैक्ट नोट का कुल जोड़ लेना।
शेयर के मुनाफे पर कितना टैक्स लगता है?
यह होल्डिंग अवधि, शेयर के प्रकार और मौजूदा कानून पर निर्भर है। सही दर आयकर विभाग (incometaxindia.gov.in) या टैक्स सलाहकार से जानें और यहां डालें।
ब्रेक-ईवन भाव क्या है?
वह बिक्री भाव जिस पर सारे चार्ज निकलने के बाद लाभ शून्य रहता है। इससे ऊपर बेचने पर ही असली कमाई होती है।