इस कैलकुलेटर का इस्तेमाल कैसे करें
- लोन राशि, ब्याज दर और लोन अवधि डालें।
- बैंक भुगतान कैसे लगाता है में मासिक, 13वीं अतिरिक्त किस्त साल भर में बांटकर चुनें — यह हर साल एक एक्स्ट्रा EMI जैसा ही है।
- अगर आपका बैंक सच में हर दो हफ्ते किस्त लेता है, तो हर दो हफ्ते, हर अवधि पर ब्याज चुनें।
- बचा हुआ ब्याज, बचा समय और चुकता होगा देखें।
एक्स्ट्रा EMI से लोन जल्दी क्यों खत्म होता है
आपकी EMI में शुरुआत के सालों में ज़्यादातर हिस्सा ब्याज का होता है। जो भी रकम EMI के ऊपर दी जाती है, वह सीधे मूलधन घटाती है, और घटे हुए मूलधन पर अगले हर महीने कम ब्याज लगता है। यही असर सालों तक जुड़ता जाता है।
हर महीने भुगतान = EMI × (1 + 1/12) EMI = P · r(1 + r)^n ÷ ((1 + r)^n − 1)- P = लोन राशि
- r = मासिक दर (सालाना दर ÷ 12 ÷ 100)
- n = मूल अवधि, महीनों में
- अतिरिक्त 1/12 पूरा मूलधन में जाता है; कैलकुलेटर महीने-दर-महीने बकाया गिनकर देखता है कि लोन कब शून्य होता है
अमेरिका में यह तरीका ‘बाइवीकली पेमेंट’ कहलाता है: हर दो हफ्ते आधी किस्त, यानी साल में 26 आधी किस्तें = 13 पूरी। भारत में बैंक मासिक EMI लेते हैं, इसलिए वही असर साल में एक अतिरिक्त EMI प्रीपेमेंट करके, या हर महीने EMI का 1/12 हिस्सा ज़्यादा देकर मिलता है।
उदाहरण: ₹50 लाख, 8.5%, 20 साल
सामान्य मासिक EMI ₹43,391.16 है। हर साल एक अतिरिक्त EMI, यानी सालाना अतिरिक्त भुगतान ₹43,391.16, देने पर लोन 199 महीने (लगभग 16 साल 7 महीने) में खत्म हो जाता है।
आप 41 महीने यानी करीब साढ़े तीन साल पहले कर्ज़-मुक्त होते हैं और ₹10.89 लाख (₹10,89,367.27) ब्याज बचता है।
बाइवीकली के रूप में देखें तो यह हर दो हफ्ते ₹21,695.58 की किस्त के बराबर है।
भारत में इसे कैसे लागू करें
- साल में एक बार बोनस या इंक्रीमेंट मिलने पर एक EMI के बराबर पार्ट-प्रीपेमेंट करें।
- या बैंक से EMI थोड़ी बढ़वाएं (लगभग 1/12 ज़्यादा); कई बैंक ऑनलाइन यह सुविधा देते हैं।
- प्रीपेमेंट करते समय बैंक को लिखित में बताएं कि आप अवधि घटाना चाहते हैं, EMI नहीं — अवधि घटाने से ब्याज ज़्यादा बचता है।
- RBI के निर्देशों के अनुसार व्यक्तिगत उधारकर्ताओं के फ्लोटिंग रेट होम लोन पर प्रीपेमेंट पेनल्टी नहीं ली जा सकती; फिक्स्ड रेट लोन की शर्तें अलग से देखें।
- किसी भी रकम के प्रीपेमेंट का असर लोन प्रीपेमेंट कैलकुलेटर से, और पूरी EMI तालिका अमॉर्टाइज़ेशन कैलकुलेटर से देखें।
क्या एक्स्ट्रा EMI हमेशा सही है
लोन की दर जितनी ऊंची और अवधि जितनी बाकी, एक्स्ट्रा EMI का फायदा उतना बड़ा। लेकिन पहले इमरजेंसी फंड, टर्म इंश्योरेंस और महंगे कर्ज़ (जैसे क्रेडिट कार्ड) का इंतज़ाम ज़रूरी है।
अगर आपको भरोसा है कि निवेश पर लंबे समय में लोन की दर से ज़्यादा टैक्स के बाद रिटर्न मिलेगा, तो कुछ लोग प्रीपेमेंट की जगह निवेश चुनते हैं। प्रीपेमेंट का फायदा पक्का है, निवेश का नहीं — यह जोखिम उठाने की आपकी क्षमता पर निर्भर है। मूल EMI के लिए होम लोन EMI कैलकुलेटर देखें।
मान्यताएं और सीमाएं
कैलकुलेटर पूरी अवधि एक ही दर मानता है और अतिरिक्त रकम को हर महीने बराबर बांटकर मूलधन में लगाता है। साल में एक बार एकमुश्त प्रीपेमेंट से नतीजा थोड़ा अलग आएगा, क्योंकि पैसा साल में एक बार जाता है।
फ्लोटिंग दर बदलने पर बैंक अवधि या EMI बदल सकता है। होम लोन ब्याज पर टैक्स लाभ, प्रीपेमेंट से उस लाभ पर असर और बैंक के नियम इसमें शामिल नहीं हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
साल में एक एक्स्ट्रा EMI से कितना फायदा होता है?
यह दर और अवधि पर निर्भर है। उदाहरण में ₹50 लाख के 20 साल के लोन पर करीब साढ़े तीन साल और ₹10.89 लाख ब्याज बचा।
प्रीपेमेंट से EMI घटाएं या अवधि?
अवधि घटाने से कुल ब्याज ज़्यादा बचता है। EMI घटाना तब ठीक है जब महीने का बजट तंग हो।
बाइवीकली पेमेंट क्या है?
हर दो हफ्ते आधी किस्त भरना, जिससे साल में 13 पूरी किस्तें हो जाती हैं। यह अमेरिका में आम है; भारत में यही असर एक अतिरिक्त EMI से मिलता है।
क्या प्रीपेमेंट पर चार्ज लगता है?
व्यक्तिगत उधारकर्ताओं के फ्लोटिंग रेट टर्म लोन पर RBI के निर्देशों के अनुसार नहीं। फिक्स्ड रेट या बिज़नेस लोन के लिए अपना एग्रीमेंट देखें।