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किराया बनाम घर खरीदना कैलकुलेटर

‘किराया तो डूबा पैसा है’ — यह बात हमेशा सही नहीं होती। यह कैलकुलेटर घर खरीदने और किराए पर रहकर बचत निवेश करने, दोनों रास्तों की नेट वर्थ को एक ही समय पर रखकर तुलना करता है।

INR
%
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साल
%प्रॉपर्टी टैक्स, बीमा और मेंटेनेंस (कीमत का %)
INR
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साल
किराए पर रहना इतना फायदेमंद₹37,09,549
किराए पर रहना इतना फायदेमंद₹37,09,549

खरीदते समय 3% और बेचते समय 6% खर्च माना गया है; जिसका मासिक खर्च कम है, वह अंतर की राशि निवेश करता है।

खरीदने पर नेट वर्थ
₹77,69,683
किराए पर रहकर निवेश करने पर नेट वर्थ
₹1,14,79,232
मासिक होम लोन EMI
₹55,541
01 क॰2 क॰12345678910
  • खरीदें
  • किराया और निवेश
वर्षखरीदने पर नेट वर्थकिराए पर रहकर निवेश करने पर नेट वर्थ
1₹16,23,375₹24,92,815
2₹21,56,808₹31,99,526
3₹27,22,235₹39,64,954
4₹33,21,727₹47,94,374
5₹39,57,498₹56,93,556
6₹46,31,919₹66,68,818
7₹53,47,530₹77,27,076
8₹61,07,050₹88,75,903
9₹69,13,393₹1,01,23,593
10₹77,69,683₹1,14,79,232

इस कैलकुलेटर का इस्तेमाल कैसे करें

  1. घर की कीमत, डाउन पेमेंट, होम लोन ब्याज दर और लोन अवधि डालें।
  2. मेंटेनेंस, प्रॉपर्टी टैक्स और बीमा का सालाना अनुमान सालाना स्वामित्व खर्च में कीमत के प्रतिशत में लिखें।
  3. उसी तरह के घर का मासिक किराया और सालाना किराया बढ़ोतरी डालें।
  4. घर की कीमत में सालाना बढ़त, सालाना निवेश रिटर्न और कितने साल रहने का प्लान है भरें, फिर दोनों तरफ़ की नेट वर्थ देखें।

तुलना कैसे की जाती है

खरीदने वाले की नेट वर्थ = तय सालों बाद घर की बाज़ार कीमत − बचा हुआ होम लोन − बेचने का खर्च। किराए वाले की नेट वर्थ = डाउन पेमेंट और खरीद खर्च की रकम, जो उसने निवेश की, और हर महीने का वह अंतर जो किराया EMI + घर के खर्च से कम होने पर बचा।

नेट वर्थ (खरीद) = H(1 + g)^Y − बकाया लोन − बेचने का खर्च    नेट वर्थ (किराया) = निवेश की गई रकम का भविष्य मूल्य (रिटर्न i पर)
  • H = घर की कीमत, g = कीमत में सालाना बढ़त
  • Y = कितने साल रहने का प्लान है
  • i = सालाना निवेश रिटर्न
  • खर्च: खरीदते समय 3% और बेचते समय 6% माना गया है

दोनों में से जिसका मासिक खर्च कम है, वह अंतर निवेश करता है। इससे तुलना बराबरी की होती है।

उदाहरण: ₹80 लाख का फ्लैट या ₹25,000 किराया

₹80 लाख का फ्लैट, 20% डाउन पेमेंट, 8.5% पर 20 साल का लोन — EMI ₹55,540.69। वही फ्लैट किराए पर ₹25,000 महीने में, किराया हर साल 5% बढ़ता है। घर की कीमत 5% सालाना बढ़ती है और निवेश पर 10% रिटर्न मिलता है।

10 साल बाद खरीदने पर नेट वर्थ लगभग ₹77.70 लाख और किराए पर रहकर निवेश करने पर ₹1.15 करोड़ (₹1,14,79,232.20) बनती है। इन मान्यताओं पर किराया लगभग ₹37.10 लाख आगे है।

अब घर की कीमत की बढ़त 7% और रहने का समय 20 साल करें: खरीदने पर ₹2.91 करोड़, किराए पर ₹3.50 करोड़। इन आंकड़ों पर किराया अब भी आगे है, लेकिन नतीजा मान्यताओं पर बहुत निर्भर है — यही इस कैलकुलेटर का असली इस्तेमाल है।

नतीजा कैसे पढ़ें

सबसे संवेदनशील इनपुट हैं: घर की कीमत की बढ़त, निवेश रिटर्न और किराए व कीमत का अनुपात। बड़े शहरों में किराया अक्सर घर की कीमत की तुलना में कम होता है, इसलिए गणित किराए की तरफ़ झुक सकता है।

किराए वाला रास्ता तभी जीतता है जब बची रकम सच में हर महीने अनुशासन से निवेश हो। अगर वह खर्च हो जाती है, तो खरीदना बेहतर होगा। निवेश के बढ़ने का अंदाज़ा कंपाउंड इंटरेस्ट कैलकुलेटर से लगाएं।

पैसे के अलावा भी बातें मायने रखती हैं: स्थिरता, शहर बदलने की आज़ादी, परिवार की ज़रूरत। गणित को एक पहलू मानें, पूरा फैसला नहीं।

आम गलतियां

  • EMI की तुलना सीधे किराए से करना, जबकि EMI में मूलधन का हिस्सा भी है और घर के अपने खर्च अलग हैं।
  • मेंटेनेंस, सोसाइटी चार्ज, प्रॉपर्टी टैक्स और मरम्मत को भूल जाना।
  • डाउन पेमेंट पर छूटे रिटर्न (अवसर लागत) को न गिनना।
  • कम सालों के लिए खरीदना: खरीद-बिक्री के खर्च कम समय में वसूल नहीं होते।
  • पहले देखें कि कितना महंगा घर संभाल सकते हैं — होम अफोर्डेबिलिटी कैलकुलेटर और डाउन पेमेंट कैलकुलेटर से।

मान्यताएं और सीमाएं

कैलकुलेटर हर साल एक जैसी बढ़त और रिटर्न मानता है, जबकि असल में प्रॉपर्टी के दाम और बाज़ार ऊपर-नीचे होते हैं। होम लोन पर टैक्स लाभ, निवेश पर टैक्स, कैपिटल गेन टैक्स, किराए का डिपॉज़िट और ब्रोकरेज इसमें शामिल नहीं हैं।

खरीद पर 3% और बिक्री पर 6% खर्च तय माना गया है; आपके राज्य की स्टांप ड्यूटी इससे अलग हो सकती है। निर्माणाधीन प्रॉपर्टी, पज़ेशन में देरी या किराए की आय यहां मॉडल नहीं होती।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या किराए पर रहना पैसा बर्बाद करना है?

ज़रूरी नहीं। घर खरीदने में भी ब्याज, मेंटेनेंस और खरीद-बिक्री के खर्च ‘डूबते’ हैं। अगर किराया कम है और बची रकम निवेश होती है, तो किराया आर्थिक रूप से बेहतर हो सकता है।

किन हालात में खरीदना बेहतर निकलता है?

जब आप लंबे समय तक उसी शहर में रहेंगे, किराया कीमत के मुकाबले ऊंचा है, और घर की कीमत की बढ़त निवेश रिटर्न के आसपास है। कैलकुलेटर में अपने आंकड़े डालकर देखें।

निवेश रिटर्न कितना मानें?

अपने असल निवेश के हिसाब से मानें — FD, म्यूचुअल फंड या दोनों का मिश्रण। एक कम और एक ज़्यादा रिटर्न डालकर नतीजे का दायरा देखें।

क्या होम लोन के टैक्स लाभ शामिल हैं?

नहीं। टैक्स लाभ आपकी टैक्स व्यवस्था और आय पर निर्भर हैं। अगर आप इन्हें लेते हैं, तो खरीदने का पक्ष थोड़ा मज़बूत होगा — अपने CA से अनुमान लें।

स्रोत और आगे पढ़ें

अंतिम समीक्षा 13 अक्टूबर 2026 · हम कैसे गणना करते हैं