इस कैलकुलेटर का इस्तेमाल कैसे करें
- नॉमिनल रिटर्न भरें: महंगाई से पहले आपका निवेश हर साल कितने प्रतिशत बढ़ता है।
- अनुमानित महंगाई दर और रिटर्न पर टैक्स (फायदे पर टैक्स का प्रतिशत) डालें; टैक्स-फ्री निवेश के लिए 0 रखें।
- निवेश की गई राशि और वर्ष भरें।
- सालाना वास्तविक रिटर्न पढ़ें, फिर भविष्य के पैसे में वैल्यू को आज के पैसे में वैल्यू से मिलाएं।
नॉमिनल बनाम रियल रिटर्न
नॉमिनल रिटर्न वह प्रतिशत है जो आपके बैंक स्टेटमेंट या म्यूचुअल फंड रिपोर्ट में छपता है। रियल रिटर्न बताता है कि कीमतें बढ़ने के बाद आपकी खरीदने की ताकत कितनी बढ़ी। अगर पैसा 12% बढ़ा और महंगाई 5% रही, तो आप पिछले साल से करीब 6.67% ज़्यादा सामान खरीद सकते हैं, पूरे 7% नहीं।
रियल = (1 + नॉमिनल × (1 − टैक्स)) / (1 + महंगाई) − 1- नॉमिनल = टैक्स और महंगाई से पहले का सालाना रिटर्न
- टैक्स = रिटर्न पर टैक्स की दर, दशमलव में (10% = 0.10)
- महंगाई = कीमतों की सालाना बढ़त
- रियल = खरीदने की ताकत की सालाना बढ़त
कैलकुलेटर पहले नॉमिनल रिटर्न से टैक्स घटाता है, फिर सीधे घटाने के बजाय फिशर फॉर्मूले से महंगाई का भाग देता है।
उदाहरण: ₹1 लाख, 10 साल
12% नॉमिनल रिटर्न और 5% महंगाई पर, बिना टैक्स के, रियल रिटर्न 6.67% है। ₹1,00,000 बढ़कर ₹3,10,585 हो जाते हैं, लेकिन आज के रुपयों में उनकी कीमत सिर्फ ₹1,90,672 है।
अब फायदे पर उदाहरण के तौर पर 10% टैक्स जोड़ें। टैक्स के बाद रिटर्न 10.8% रह जाता है और रियल रिटर्न 5.52%। दस साल बाद आपके पास ₹2,78,867 होंगे, जिनसे उतना ही खरीदा जा सकेगा जितना आज ₹1,71,200 से।
जब रिटर्न महंगाई से हार जाए
मान लीजिए FD पर 7% ब्याज है, महंगाई 6% है और आप 30% टैक्स स्लैब में हैं (यह सिर्फ उदाहरण है)। टैक्स के बाद रिटर्न 4.9% बचता है और रियल रिटर्न −1.04%। दस साल में ₹1,00,000 कागज़ पर ₹1,61,345 हो जाते हैं, पर आज के रुपयों में सिर्फ ₹90,094 के बराबर। रुपये ज़्यादा, खरीदने की ताकत कम।
इसीलिए लंबे समय की पूरी बचत कम ब्याज वाली जगह पर रखने से उसकी वैल्यू चुपचाप घट सकती है। किसी अवधि में कीमतें कितनी बढ़ीं, यह महंगाई कैलकुलेटर से देखें, और नॉमिनल बढ़त का अनुमान कंपाउंड इंटरेस्ट कैलकुलेटर से लगाएं।
नतीजे का इस्तेमाल कैसे करें
लंबे लक्ष्य आज के रुपयों में तय करें। अगर बच्चे की पढ़ाई या रिटायरमेंट के लिए 20 साल बाद आज के ₹50 लाख जितनी खरीदने की ताकत चाहिए, तो रियल रिटर्न और आज की कीमतों से हिसाब लगाएं, नॉमिनल आंकड़ों से नहीं। फिर देखें कि आपका SIP और एसेट मिक्स उतना रियल रिटर्न दे सकता है या नहीं।
महंगाई के लिए 4%, 6% और 8% जैसी दो-तीन दरें डालकर देखें। नतीजों का फैलाव बताता है कि आपकी योजना कितनी नाज़ुक है।
रियल रिटर्न बचाने के तरीके
- जहां कानूनन संभव हो, टैक्स-बचत वाले विकल्प इस्तेमाल करें ताकि हर साल रिटर्न का कम हिस्सा टैक्स में जाए; नियम अपने CA या incometaxindia.gov.in से जांचें।
- फीस और एक्सपेंस रेशियो कम रखें; लंबे समय का असर एक्सपेंस रेशियो कैलकुलेटर में देखें।
- एसेट को समय-सीमा से मिलाएं: कम समय की ज़रूरत के लिए सुरक्षा, लंबे लक्ष्य के लिए ऐसी ग्रोथ जो महंगाई को पीछे छोड़ सके।
- हर साल योजना दोबारा देखें, क्योंकि महंगाई और ब्याज दरें बदलती रहती हैं।
मान्यताएं और सीमाएं
रिटर्न, महंगाई और टैक्स की दर हर साल एक जैसी मानी गई है, और टैक्स पूरे सालाना रिटर्न पर हर साल चुकाया हुआ माना गया है। असल में बाज़ार ऊपर-नीचे होता है, और भारत में टैक्स निवेश के प्रकार, होल्डिंग अवधि और आपके स्लैब पर निर्भर करता है। नतीजे एक उदाहरण हैं, भविष्यवाणी नहीं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
रियल रिटर्न कैसे निकालते हैं?
एक प्लस टैक्स के बाद वाले नॉमिनल रिटर्न को एक प्लस महंगाई से भाग दें और एक घटा दें। कम दरों पर सीधे महंगाई घटाने से भी करीब-करीब वही जवाब मिलता है।
रियल रिटर्न 'नॉमिनल माइनस महंगाई' से थोड़ा अलग क्यों है?
क्योंकि महंगाई बढ़त वाले हिस्से की वैल्यू भी घटाती है। सही फॉर्मूला घटाने के बजाय भाग देता है, और दरें जितनी ऊंची हों, फर्क उतना बढ़ता है।
अच्छा रियल रिटर्न कितना है?
कोई भी पॉज़िटिव रियल रिटर्न आपकी खरीदने की ताकत बढ़ाता है। कितना अच्छा है, यह आपके लक्ष्य और लिए गए जोखिम पर निर्भर है।
कौन सी महंगाई दर डालें?
लंबी अवधि का कोई उचित औसत लें, जैसे RBI का महंगाई लक्ष्य, और सुरक्षा के लिए ऊंची दर से भी जांचें। पढ़ाई और इलाज जैसे खर्च अक्सर औसत महंगाई से तेज़ बढ़ते हैं।